पाकुड़ पॉलिटेक्निक में बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं वायरिंग कनेक्शन पर एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

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पाकुड़ पॉलिटेक्निक के विद्युत अभियंत्रण विभाग द्वारा “बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं वायरिंग कनेक्शन” पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कार्यपालक अभियंता शैलेन्द्र रहे। कार्यशाला में छात्रों को विद्युत के मूलभूत सिद्धांतों, सुरक्षा मानकों, सर्किट आरेख और औद्योगिक उपकरणों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। छात्रों ने घरेलू वायरिंग और मोटर कनेक्शन जैसे तकनीकी कार्यों का स्वयं प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया।

व्यावहारिक शिक्षा पर जोर: पाकुड़ पॉलिटेक्निक में इलेक्ट्रिकल कार्यशाला

पाकुड़ पॉलिटेक्निक के विद्युत अभियंत्रण विभाग द्वारा शनिवार को एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विषय “बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं वायरिंग कनेक्शन” था। सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चली इस कार्यशाला में संस्थान के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्या डॉ. सुषमा यादव के मार्गदर्शन और विभागाध्यक्ष आशीष कुमार के नेतृत्व में किया गया।

तकनीकी ज्ञान और सुरक्षा मानकों का समावेश

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों को विद्युत अभियंत्रण के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था। मुख्य अतिथि कार्यपालक अभियंता शैलेन्द्र ने छात्रों को विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण प्रणाली की मूलभूत अवधारणाएं समझाईं। सत्र के दौरान वोल्टेज, करंट, प्रतिरोध और विद्युत परिपथ के सुरक्षा मानकों पर विशेष चर्चा की गई। प्रीति कुमारी और प्रणव कुमार डे ने तकनीकी सत्रों का संचालन करते हुए छात्रों को ट्रांसफॉर्मर, डीसी मोटर और इंडक्शन मोटर के सिद्धांतों से रूबरू कराया।

हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग: प्रयोगों के जरिए सीखा वायरिंग का हुनर

व्यावहारिक सत्र कार्यशाला का सबसे मुख्य आकर्षण रहा। छात्रों ने सीरीज और पैरेलल सर्किट, घरेलू वायरिंग, स्विच-सॉकेट कनेक्शन और नियंत्रण पैनल वायरिंग का लाइव डेमो देखा। मल्टीमीटर के उपयोग और इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख घटकों जैसे रेसिस्टर, डायोड और ट्रांजिस्टर की कार्यप्रणाली को समझने के लिए छात्रों को स्वयं प्रयोग करने का मौका दिया गया। इससे विद्यार्थियों को औद्योगिक स्तर पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

भविष्य की तैयारियों के लिए संवाद

कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक मिनी प्रोजेक्ट गतिविधि और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जहाँ छात्रों ने अपने संदेह दूर किए। विभागाध्यक्ष आशीष कुमार ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं छात्रों को किताबी ज्ञान से परे वास्तविक औद्योगिक माहौल के लिए तैयार करती हैं। कार्यक्रम की सफलता ने स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी कौशल के प्रति छात्रों में उत्साह कितना अधिक है।

rohini shree
Author: rohini shree

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