प्रवीण कुमार, कटिहार। बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित रोशना बाजार का दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। यह मंदिर मनोकामना सिद्धि के लिए चर्चित है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि शुभ कार्य के लिए घर से निकलने से पहले यहां मां दुर्गा से मन्नत मांगने पर कार्य सफल होता है। नवरात्र के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मनोकामना पूरी होने पर भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देते हैं या मां की प्रतिमा चढ़ाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में भी इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है।
संगमरमर की प्रतिमा है आकर्षण का केंद्र, नहीं होती बलि
रोशना बाजार के दुर्गा मंदिर में संगमरमर से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस प्रतिमा को काशी से लाकर मंदिर में स्थापित किया गया था। मंदिर की एक विशेष परंपरा यह है कि यहां पूजा के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता, बल्कि केवल कलश का विसर्जन होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में कभी भी बलि देने की परंपरा नहीं रही है। नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं।
विजयादशमी पर होता है संथाली नृत्य का भव्य आयोजन
रोशना दुर्गा मंदिर में धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को भी विशेष महत्व दिया जाता है। हर साल विजयादशमी के दिन मंदिर परिसर में संथाली नृत्य का भव्य आयोजन होता है। पूजा समिति की ओर से नृत्य प्रस्तुत करने वाली टीमों के लिए आकर्षक पुरस्कार भी रखे जाते हैं। इस कार्यक्रम में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की विभिन्न नृत्य टीमें अपनी प्रस्तुति देने पहुंचती हैं। इससे दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलता है।
मनोकामना पूरी होने की मान्यता से दूर-दूर से आते हैं भक्त
मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, मां दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने की श्रद्धालुओं में मान्यता है। इसी विश्वास के कारण नवरात्र के समय मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पूजा-अर्चना, मन्नत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चलते रोशना बाजार का दुर्गा मंदिर प्राणपुर और आसपास के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखता है। स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर आस्था, परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का महत्वपूर्ण केंद्र है।





