भागलपुर, सबौर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में निदेशालय अनुसंधान के तत्वावधान में सोमवार को हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिन्दी को शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कृषि प्रसार से जोड़ने और वैज्ञानिक ज्ञान को सरल हिन्दी में किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन अपराह्न 3:30 बजे किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए बीएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि हिन्दी को केवल संवाद की भाषा तक सीमित रखने के बजाय इसे ज्ञान-सृजन, वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि तकनीकों के प्रसार की प्रभावी भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ खेत और किसान तक पहुंचे। इसके लिए शोध परिणामों, कृषि तकनीकों और नवाचारों को सरल एवं सहज हिन्दी में उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों और शिक्षकों से हिन्दी में तकनीकी एवं किसानोपयोगी साहित्य तैयार करने तथा कृषि अनुसंधान की उपलब्धियों को भारतीय भाषाओं में प्रसारित करने का आह्वान किया।
डॉ. सिंह ने ‘हिन्दी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’ विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और किसानों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें आधुनिक विज्ञान, डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे स्थानीय ज्ञान को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हिन्दी में केवल बोलने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि हिन्दी में लिखने, वैज्ञानिक ज्ञान को अभिव्यक्त करने और उसे जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य करना होगा।
इस अवसर पर बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि हिन्दी हमारी संस्कृति, संवेदना और ज्ञान-परंपरा को समाज से जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध पारंपरिक ज्ञान-परंपरा को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़कर नई पीढ़ी और समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल नई तकनीकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तकनीकों को किसानों तक उनकी सहज भाषा में पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बीएयू के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि हिन्दी दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रशासनिक और प्रसार कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग के प्रति जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि हिन्दी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। समारोह में निदेशक योजना डॉ. अरुण कुमार, मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार, कृषि अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. एम.के. वाधवानी, कृषि विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार, प्रसार शिक्षा के सह निदेशक डॉ. राज नारायण सिंह, उप निदेशक अनुसंधान डॉ. शैलाबाला देई तथा सीएबीटी के प्राचार्य डॉ. रवि केसरी सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में हिन्दी को कृषि अनुसंधान, तकनीकी ज्ञान, किसान प्रशिक्षण और डिजिटल नवाचारों से जोड़ने तथा विश्वविद्यालय के कार्यों में हिन्दी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।





