महागामा: महागामा नगर पंचायत के दैनिक कर्मियों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे कर्मियों और प्रशासन के बीच विवाद उस समय और गहरा गया, जब नगर पंचायत बोर्ड ने 13 सूत्री स्वघोषणा पत्र जारी किया। प्रशासन इसे कार्य पर वापसी की प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, जबकि आंदोलनरत कर्मियों ने इसे अपने अधिकारों पर शर्तें थोपने वाला दस्तावेज बताया है।
धरनास्थल पर मौजूद कर्मियों का कहना है कि वे पिछले आठ वर्षों से नगर पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था समेत विभिन्न कार्यों का नियमित रूप से निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ, बीमा और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका है। उनका आरोप है कि लंबित मांगों के समाधान के बजाय प्रशासन ने शर्तों से युक्त स्वघोषणा पत्र जारी कर दिया है।
कर्मियों ने स्वघोषणा पत्र में शामिल भविष्य में धरना-प्रदर्शन नहीं करने, बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर सेवा समाप्ति, एक परिवार से केवल एक सदस्य को कार्य पर रखने और स्थानीय निवासी होने जैसी शर्तों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ये शर्तें कर्मचारियों की स्वतंत्रता और श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
वहीं, झारखंड लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के जिला अध्यक्ष सुमेश्वर मेहतर ने नगर पंचायत के फैसले को एकतरफा बताया। उन्होंने कहा कि मजदूरों और उनके प्रतिनिधियों से बिना किसी संवाद के ऐसी शर्तें लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने और कर्मियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।





