प्रवीण कुमार, कटिहार। जयमाला शिक्षा निकेतन में छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष योग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुंगेर योग विश्वविद्यालय से आए योग विशेषज्ञ डॉ. योगेश कुमार ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता, स्मरण शक्ति, सकारात्मक सोच और आत्मनियंत्रण का विकास करना था।
इस दौरान डॉ. योगेश कुमार ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम की जानकारी देते हुए उनका व्यावहारिक अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि नियमित योग करने से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मन भी शांत रहता है। विद्यार्थियों के लिए योग विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि इससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने, तनाव एवं क्रोध पर नियंत्रण रखने तथा पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। उन्होंने बच्चों को पढ़ाई के दौरान बेहतर एकाग्रता और मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन कुछ समय योग एवं प्राणायाम के लिए निकालने की सलाह दी।
डॉ. योगेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों की दिनचर्या में मोबाइल, इंटरनेट और पढ़ाई का बढ़ता दबाव उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में योग जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। नियमित योग से शरीर में स्फूर्ति आती है, मन प्रसन्न रहता है और बच्चों में अनुशासन एवं आत्मविश्वास का विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को योग को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में जिला जेल अन्वेषण पदाधिकारी श्री राजेश कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए योग के महत्व को समझाया और कहा कि स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन ही सफलता की मजबूत नींव है। उन्होंने बच्चों को नियमित योग करने, अनुशासित जीवन जीने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि योग विद्यार्थियों को शारीरिक मजबूती देने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है। इससे उनमें धैर्य, एकाग्रता और आत्मनियंत्रण की भावना विकसित होती है।
विद्यालय के निदेशक डॉ. सुशील कुमार सुमन ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यालय में बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान से बच्चों का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक सोच के लिए योग एवं प्राणायाम अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि “करो योग, रहो निरोग” केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ और अनुशासित जीवन जीने का मंत्र है। यदि बच्चे छोटी उम्र से ही योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो वे भविष्य में कई शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों से बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि योग विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न योगासनों एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। योग विशेषज्ञ ने बच्चों की दिनचर्या के अनुसार सरल एवं उपयोगी योगाभ्यास बताए, जिन्हें वे नियमित रूप से कर सकते हैं। कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण एवं सकारात्मक रहा।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और संस्कार को समान महत्व देना आवश्यक है। इस प्रकार के योग कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित किया जाता रहेगा।





