पटना: बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा प्राप्त डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लड़ाई वोट चोरी के आरोपों और लोकतंत्र को बचाने से जुड़ी है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ट्रेनों, मेट्रो स्टेशनों और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने की भी निंदा की।
डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक आंदोलन को रोकने के लिए धारा 163 लागू कर बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन में शामिल नेताओं, युवाओं, छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने विपक्षी सांसदों की बात नहीं सुने जाने और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इन मुद्दों पर चर्चा जरूरी है।
अपने बयान में डॉ. हिमांशु ने केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने नोटबंदी, शिक्षा के निजीकरण, महंगाई, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उन्होंने देश के लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने की अपील की। हालांकि, वोट चोरी, गिरफ्तारियों और प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधों से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।





