सात दिवसीय शतचंडी महायज्ञ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, यज्ञ मंडप परिक्रमा का बताया गया महत्व

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साहिबगंज के मां बायसी मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय नौ कुंडीय शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तांत्रिक विजय जी महाराज ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा को अत्यंत कल्याणकारी बताते हुए सनातन धर्म और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर दिया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, कथा और रासलीला ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

 

साहिबगंज। शहर स्थित मां बायसी मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय नौ कुंडीय शतचंडी महायज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुंचने लगे और पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते रहे।
महायज्ञ के तीसरे दिन वैदिक आचार्यों और पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान कर यज्ञ मंडप का विधिवत पूजन एवं हवन संपन्न कराया। सुबह, दोपहर और संध्या बेला में विशेष पूजा-अर्चना तथा आरती का आयोजन किया गया। मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
इस अवसर पर तांत्रिक विजय जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यज्ञ मंडप की परिक्रमा अत्यंत कल्याणकारी और लाभदायक मानी जाती है। उन्होंने बताया कि सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। साथ ही जीवन की अनेक बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता भी है।
उन्होंने कहा कि यज्ञ स्थल पर 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है और श्रद्धा के साथ की गई परिक्रमा चारों धामों की यात्रा के समान पुण्य फल प्रदान करती है। यज्ञ मंडप की परिक्रमा घड़ी की दिशा में अर्थात दाहिने हाथ की ओर से करनी चाहिए, जिससे धार्मिक परंपराओं का पालन होता है और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

 

तांत्रिक विजय महाराज ने अभिभावकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों को सनातन धर्म, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़कर रखें। उन्हें धर्म का ज्ञान दें तथा परिवार सहित धार्मिक आयोजनों में भाग लें, ताकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को समझ सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
महायज्ञ के दौरान आयोजित श्रीमद्भागवत कथा और रासलीला ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा मंचन में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण किया गया, जबकि शिव बारात की झांकी ने दर्शकों का विशेष आकर्षण बटोरा। महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में कथा श्रवण और रासलीला का आनंद लेने पहुंचे।
यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि महायज्ञ के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोजन समिति द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है और श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
rohini shree
Author: rohini shree

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