कदवा (कटिहार)। भारत की आजादी की लड़ाई में कदवा क्षेत्र के लोगों ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कदवा थाना अंग्रेजी शासन के विरोध में आंदोलनकारियों के निशाने पर रहा और इसे जला दिया गया था। उस दौर में क्षेत्र में कई स्थानों पर आंदोलनकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और कार्रवाई की थी।
स्वतंत्रता सेनानी विष्णु प्रसाद सिंह के पुत्र सह पूर्व मुखिया सुमंत कुमार सिंह ने बताया कि 1942 में कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। कदवा क्षेत्र के लोगों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आंदोलन के दौरान कई लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, जेल गए और कुछ आंदोलनकारी शहीद भी हुए।
सुमंत कुमार सिंह के अनुसार उनके पिता विष्णु प्रसाद सिंह के साथ परमेश्वर प्रसाद सिंह, यमुना प्रसाद सिंह, रतीलाल मंडल, परमेश्वरी मंडल, परमानंद ठाकुर, रामलाल मंडल, नकछेदी मंडल, राम जी विश्वास, रसूल मियां, रामेश्वर गौड़, दुख मोचन मिश्रा और झगड़ु मंडल सहित कई लोगों ने आंदोलन में भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दुर्गागंज स्थित डाकघर में टेलीफोन का तार काटकर दूरसंचार व्यवस्था को बाधित किया गया था। इसके बाद कदवा थाना को जलाया गया। कदवा के अड़गड़ा को भी आग के हवाले किए जाने और झौआ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन उखाड़े जाने की बात उन्होंने बताई। इस आंदोलन में झगड़ु मंडल की प्रमुख भूमिका बताई गई है।
स्वतंत्रता सेनानियों को मिला सम्मान
सुमंत कुमार सिंह ने बताया कि देश की आजादी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों को इलाहाबाद बुलाकर ताम्रपत्र और चादर देकर सम्मानित किया गया था। स्वतंत्रता सेनानियों के लिए पेंशन की व्यवस्था भी लागू की गई थी।
उन्होंने बताया कि कदवा प्रखंड मुख्यालय में पिछले वर्ष सभी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ का निर्माण कराया गया है। वहीं कदवा थाना के सामने उनके पिता और स्वतंत्रता सेनानी विष्णु प्रसाद सिंह की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
हर वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को याद किया जाता है। इस वर्ष भी स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ पर तिरंगा फहराया जाएगा और आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।




