कांग्रेस का निशिकांत दुबे पर हमला, पत्नी की संपत्ति बढ़ोतरी को बताया भ्रष्टाचार का मामला

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नई दिल्ली : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और उनकी पत्नी अनामिका गौतम की संपत्ति में बीते 15 वर्षों में हुई भारी वृद्धि पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इसे मोदी सरकार के भ्रष्टाचार मिटाने के दावों की पोल खोलने वाला मामला बताया है और दुबे दंपती से स्पष्टीकरण के साथ गहन जांच की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता और सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने इंदिरा भवन स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि दुबे दंपती की संपत्ति में जो असामान्य वृद्धि हुई है, वह आय के स्रोतों से मेल नहीं खाती। उन्होंने दुबे के 2009 से 2024 तक के चुनावी हलफनामों और उनकी पत्नी के आयकर रिटर्न का हवाला दिया। श्रीनेत के अनुसार, 2009 में अनामिका गौतम की संपत्ति 50 लाख रुपये थी, 2014 में यह बढ़कर 6.56 करोड़ रुपये हुई, 2019 में संपत्ति 13.05 करोड़ रुपये, और 2024 में यह लगभग 40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। ऋण की राशि घटाने के बाद भी उनकी कुल संपत्ति 31.32 करोड़ रुपये दर्शाई गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि 2013-14 में अनामिका गौतम की वार्षिक आय मात्र चार लाख रुपये थी, जो 2017-18 में बढ़कर 2.16 करोड़ रुपये हो गई — यानी करीब 54 गुना वृद्धि। जबकि संपत्ति में यह उछाल आय से कहीं अधिक है। श्रीनेत ने 2024 के हलफनामे में दर्ज 8.28 करोड़ रुपये के कथित लोन पर भी सवाल उठाए, जो चार अलग-अलग व्यक्तियों से लिया गया बताया गया है। उन्होंने कहा कि यह संभवतः “असुरक्षित ऋण” है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दुबे ने अभिषेक झा नामक व्यक्ति से 1 करोड़ रुपये उधार लेने का दावा किया है, जबकि झा ने इसे सार्वजनिक रूप से झूठा बताया है और खुद दुबे के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने कहा कि यह “आय से अधिक संपत्ति का साफ मामला” है और केंद्र सरकार तथा भाजपा नेतृत्व की चुप्पी भ्रष्टाचार पर दोहरे रवैये को उजागर करती है। श्रीनेत ने कहा, “विपक्षी नेताओं पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन भाजपा नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह मोदी सरकार के भ्रष्टाचार मिटाने के खोखले दावों को बेनकाब करता है।” कांग्रेस ने बताया कि 24 मई 2025 को लोकपाल में निशिकांत दुबे के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। 24 जुलाई को लोकपाल बेंच ने दुबे को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने कोई जवाब दिया है या नहीं। पार्टी ने लोकपाल के कामकाज में पारदर्शिता लाने की मांग भी उठाई।

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