झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बरहरवा में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से मुलाकात कर लंबित मांगों और जारी आंदोलन पर चर्चा की। संघ ने बताया कि 12 मार्च 2026 से मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। प्रतिनिधिमंडल ने लिखित ज्ञापन सौंपकर मांगों के समर्थन और समाधान के लिए पूर्व मंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की।
मनरेगा कर्मियों की मांगों को लेकर पूर्व मंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल
बरहरवा। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्य के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ राजनीतिक नेता आलमगीर आलम से उनके पैतृक आवास इस्लामपुर में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें बुके और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया तथा संगठन की ओर से शुभकामनाएं एवं बधाई दी। मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राज्यभर के मनरेगा क्षेत्रीय कर्मियों की समस्याओं, लंबित मांगों और जारी आंदोलन को लेकर समर्थन प्राप्त करना था।
85 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल
बैठक के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने पूर्व मंत्री को विस्तार से बताया कि झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्य के मनरेगा क्षेत्रीय कर्मी 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी विभिन्न मांगें लंबे समय से लंबित हैं और बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि आंदोलन को 85 दिनों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सरकार और विभागीय स्तर पर अब तक कोई निर्णायक पहल नहीं हो सकी है। इससे कर्मचारियों के बीच निराशा और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
वार्ता के बावजूद नहीं निकला समाधान
संघ के प्रतिनिधियों ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को बताया कि आंदोलन के दौरान विभागीय स्तर पर कई दौर की वार्ताएं आयोजित की गईं। विभिन्न मांगों और मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा भी हुई तथा कई बिंदुओं पर सहमति बनने की बात सामने आई।
हालांकि संघ का आरोप है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें विभाग द्वारा तैयार किए गए समझौता मसौदे में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया। कर्मचारियों की ओर से आवश्यक संशोधनों का प्रस्ताव भी विभाग को दिया गया, लेकिन संशोधित मसौदा अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया और आगे की वार्ता भी आयोजित नहीं हुई।
लिखित ज्ञापन सौंपकर मांगा हस्तक्षेप
मुलाकात के दौरान मनरेगा कर्मचारी संघ ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में कर्मचारियों की प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए उनके समाधान के लिए सहयोग और हस्तक्षेप की मांग की गई।
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि मनरेगा कर्मी ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वरिष्ठ नेता होने के नाते आलमगीर आलम इस मुद्दे को उचित मंच तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे।
कर्मचारियों ने समस्याओं से कराया अवगत
प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा कर्मियों की सेवा शर्तों, कार्यस्थल की चुनौतियों, लंबित मांगों और रोजगार सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी विस्तार से रखा। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से विचाराधीन हैं और इनका समाधान होने से हजारों कर्मियों को राहत मिलेगी।
सकारात्मक पहल की उम्मीद
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य आंदोलन के माध्यम से अपनी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना और समाधान प्राप्त करना है।
संवाद से समाधान की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि आने वाले दिनों में सरकार और विभाग की ओर से सकारात्मक पहल होगी तथा लंबित मुद्दों का समाधान निकलेगा। वहीं कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की अपील भी की।





