साहिबगंज के मंडरो प्रखंड स्थित राजमहल पहाड़ी के पहाड़िया गांवों में आज भी पेयजल, बिजली, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। महिलाएं तीन किलोमीटर दूर झरनों से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जन मन योजना और सोलर लाइट स्थापना में अवैध वसूली का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने पर डीडीसी ने जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
साहिबगंज। प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता से भरपूर राजमहल पहाड़ियों पर बसे आदिम जनजाति बहुल गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ सके हैं। प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न योजनाओं की शुरुआत तो हुई, लेकिन कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं या उनका लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसका उदाहरण मंडरो प्रखंड की दामिनभिट्ठा पंचायत के अंतर्गत स्थित बड़ा पंचरुखी गांव और आसपास के पहाड़िया गांव हैं, जहां लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
गांव की बुजुर्ग महिला मरांग कुड़ी बताती हैं कि पेयजल के लिए उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गांव में सोलर जलमीनार का ढांचा कई वर्षों से खड़ा है, लेकिन उसमें अब तक सोलर पैनल और अन्य आवश्यक उपकरण नहीं लगाए गए हैं। नतीजतन जलमीनार शोपीस बनकर रह गया है और ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।

मेसी पहाड़िन बताती हैं कि गांव के लोगों को मजबूरी में झरने का गंदा पानी पीना पड़ता है। महिलाएं पहले पानी को घर लाती हैं, फिर सूती कपड़े से छानकर उपयोग करती हैं। वहीं ललिता पहाड़िन के अनुसार पानी लाने के लिए प्रतिदिन लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यही पानी पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग किया जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में मौजूद कुएं का पानी भी पीने योग्य नहीं है। महिलाएं उसका उपयोग केवल बर्तन धोने और साफ-सफाई के लिए करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं झरनों के पास छोटे-छोटे गड्ढे खोदकर कटोरे से पानी निकालती हैं और फिर उसे छानकर घर ले जाती हैं। जिस पानी को देखकर लोग उपयोग करने से हिचकें, वही पानी यहां के ग्रामीणों की जीवनरेखा बना हुआ है।

सिर्फ पेयजल ही नहीं, शिक्षा और बिजली की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में विद्यालय नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हाल ही में बना आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद पड़ा है। करीब 25 से 30 बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित हैं। बिजली की समस्या भी गंभीर है। कहीं पोल लगे हैं तो ट्रांसफॉर्मर खराब है, तो कहीं तारों का अभाव है।

ग्रामीणों ने जन मन योजना के तहत आवास निर्माण में भी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहली किस्त जारी कराने के नाम पर प्रखंड के एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने प्रत्येक लाभुक से एक हजार रुपये की मांग की। वहीं गांव में सोलर लाइट लगाने के दौरान भी लोगों से 500 से 800 रुपये तक वसूले जाने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से गांवों का दौरा करते थे, जिससे समस्याओं का समाधान होता था। लेकिन अब अधिकारी गांव नहीं पहुंचते, जिसके कारण योजनाओं की निगरानी कमजोर हो गई है और आदिम जनजाति समुदाय सरकारी लाभ से वंचित रह रहा है।

मामले की जानकारी मिलने पर उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को गांवों में पेयजल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं। वहीं विद्युत विभाग को ट्रांसफॉर्मर और बिजली लाइन की व्यवस्था जल्द दुरुस्त करने को कहा गया है। डीडीसी ने सभी बीडीओ को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के पहाड़िया गांवों का दौरा कर दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही जन मन योजना में कथित अवैध वसूली की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया है।






