खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा संरक्षण की दी जानकारी

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खेत बचाओ अभियान के तहत देवीनगर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को मृदा संरक्षण, जैव उर्वरकों के उपयोग और टिकाऊ खेती की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने ढैंचा को हरी खाद के रूप में अपनाने तथा मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी। कम वर्षा के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को कम अवधि वाली धान की उन्नत किस्मों की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।

 

खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया गया जागरूक

पाकुड़। खेत बचाओ अभियान के 12वें दिन देवीनगर स्थित एसबीआई फाउंडेशन कार्यालय में किसानों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खुरीडीह, लालचुवां, पत्थरदाहा और देवीनगर के किसानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों, मृदा संरक्षण और बेहतर उत्पादन तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन लागत कम करने के उपायों की जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि ढैंचा को हरी खाद के रूप में प्रयोग कर खेतों की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि ढैंचा की बुवाई के लगभग 30 से 40 दिनों बाद उसकी जुताई कर उसे मिट्टी में मिला देने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा फसलों को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
इसके अलावा किसानों को एज़ोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों के महत्व के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बीज शोधन के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करने से फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। साथ ही किसानों को सलाह दी गई कि वे मिट्टी जांच की अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि हो सके।
कार्यक्रम में बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करना चाहिए ताकि संभावित मौसमीय जोखिमों से बचा जा सके।
कृषि विशेषज्ञों ने सहभागी धान, सीआर श्रृंखला, आईआर-36 तथा विकल्प धान जैसी कम अवधि वाली किस्मों की खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये किस्में कम पानी की उपलब्धता की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं और किसानों को नुकसान से बचाने में मददगार साबित हो सकती हैं।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, पाकुड़ की डॉ. किरण मेरी कंडीर और राहुल भट्टाचार्य ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। वहीं प्रवाह संस्था के बरुण पाण्डेय और एसबीआई फाउंडेशन की टीम ने भी किसानों को मौसम के अनुरूप खेती अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
आयोजकों ने बताया कि खेत बचाओ अभियान 1 जून से 30 जून तक जिले के विभिन्न गांवों में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
rohini shree
Author: rohini shree

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