पटना: बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचल दिया था।
उन्होंने कहा कि 51 वर्ष पूर्व इसी रात देश की जनता सोई थी और जब सुबह आंख खुली तो लोकतंत्र की हत्या हो चुकी थी। विपक्षी नेता जेलों में बंद थे, पत्रकारों की आवाज दबा दी गई थी और जनता के मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि तानाशाही के विरुद्ध सबसे मजबूत आवाज बिहार की धरती से उठी थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू हुए संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने देशभर के युवाओं और छात्रों को एकजुट किया और लोकतंत्र की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने हमेशा अन्याय और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई है और जेपी आंदोलन उसी लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक था।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो पार्टी आज संविधान बचाने की बात करती है, उसी ने अनुच्छेद 352 का उपयोग कर देश में 21 महीने तक आपातकाल लागू रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंचाया गया।
उन्होंने आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और मीसा बंदियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए सरकार संविधान की मूल भावना—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व—के प्रति प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए सरकार संकल्पित

