
गोड्डा : झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर रविवार को बसंतराय प्रखंड के बोदरा पंचायत भवन में स्थायी लोक अदालत की भूमिका, कार्यप्रणाली एवं उसकी उपयोगिता को लेकर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष विजय कुमार पांडेय ने कहा कि स्थायी लोक अदालत आम जनता को सस्ता, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक प्रभावी मंच है। यहां लोगों को नियमित न्यायालयों की लंबी प्रक्रिया, बार-बार की तारीखों और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है तथा यह सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध किसी अन्य न्यायालय में अपील का प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई भी व्यक्ति बिना वकील के भी अपनी बात रख सकता है। साथ ही, मुकदमा दायर करने के लिए किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं देनी पड़ती, जिससे गरीब एवं कमजोर वर्ग के लोगों को भी आसानी से न्याय मिल पाता है। उन्होंने कहा कि आपसी समझौते से विवादों के निपटारे से दोनों पक्षों के बीच सौहार्द बना रहता है और सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं।
स्थायी लोक अदालत के सदस्य डॉ. नीरज कुमार मिश्रा ने कहा कि इस अदालत में मुख्य रूप से बैंक ऋण विवाद, सेवाओं में त्रुटि तथा सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित मामलों का निपटारा किया जाता है। इनमें परिवहन सेवा, डाक एवं दूरसंचार सेवाएं, बिजली, पानी, अस्पताल एवं औषधालय सेवाएं, बीमा सेवाएं तथा स्वच्छता एवं सफाई व्यवस्था से जुड़े विवाद शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत केवल उन मामलों की सुनवाई कर सकती है, जिनमें दावे की राशि एक करोड़ रुपये तक हो। ऐसे मामलों में अदालत सबसे पहले दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह एवं समझौते का प्रयास करती है। यदि समझौता नहीं हो पाता है तो अदालत मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाती है।
सदस्य दिनकर कुमार ने कहा कि स्थायी लोक अदालत को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत गवाहों को बुलाने, शपथ दिलाने एवं साक्ष्य लेने की शक्तियां प्राप्त हैं। उन्होंने लोगों से अपने छोटे-बड़े विवादों के समाधान के लिए इस व्यवस्था का लाभ उठाने की अपील की।
कार्यशाला में पूर्व मुखिया जनार्दन मंडल, अधिकार मित्र जायसवाल मांझी एवं बिट्टू मंडल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए ग्रामीणों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत के माध्यम से कम समय में विवादों का समाधान संभव है।
कार्यक्रम के अंत में मुखिया इंदु देवी ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं उपस्थित ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर लोगों को स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली, अधिकार क्षेत्र एवं उससे मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे ग्रामीणों में कानूनी जागरूकता बढ़ी।

