कटिहार के मनिहारी स्थित ऐतिहासिक पीर पर्वत पर बाबा जीतनशाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार, आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र

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कटिहार: जिले के मनिहारी बाजार स्थित ऐतिहासिक पीर पर्वत पर बाबा जीतनशाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थल अब पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में भी शामिल हो चुका है। यहां हर धर्म, जाति और समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी मन्नतें मांगते हैं।

करीब 60 फीट ऊंचे पीर पर्वत पर स्थित इस ऐतिहासिक मजार का निर्माण वर्ष 1338 ईस्वी में कराया गया था। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मनिहारी निवासी स्वर्गीय अतुल मुखर्जी ने अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद यहां भवन निर्माण करवाया था। तभी से यह स्थान श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि श्रद्धालु यहां कपड़े में पत्थर का छोटा टुकड़ा बांधकर अपनी मन्नत मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर वे दोबारा यहां आकर चादर, प्रसाद और अन्य श्रद्धा सामग्री अर्पित करते हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाले उर्स के दौरान यहां कव्वाली, जलसा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पीर पर्वत पर इमली, आम सहित कई प्रकार के पेड़-पौधे मौजूद हैं। मजार परिसर में एक प्राचीन कुआं भी है, जिसके मीठे पानी को श्रद्धालु विशेष महत्व देते हैं। सावन के महीने में गंगा नदी का जल मजार क्षेत्र तक पहुंचने की मान्यता भी इस स्थल की धार्मिक पहचान को और विशेष बनाती है।

आज मनिहारी का यह ऐतिहासिक धार्मिक स्थल कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, भागलपुर, खगड़िया सहित झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण पीर पर्वत क्षेत्र की पहचान लगातार बढ़ रही है।

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Author: kelanchaltimes

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