भागलपुर: गोपालपुर प्रखंड क्षेत्र में वर्ष 2008 में सरकारी धन से निर्मित स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन आज भी स्वास्थ्य सेवाओं का इंतजार कर रहा है। निर्माण के करीब 18 साल बाद भी भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है। नतीजतन, जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए था, वहां आज भूसा, मक्का का लारा और अन्य कृषि सामग्री रखी जा रही है। इसके कारण आसपास के हजारों ग्रामीण अब भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, इस स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण तत्कालीन गोपालपुर विधायक गोपाल मंडल के कार्यकाल में कराया गया था। भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद इसे विभाग को विधिवत सुपुर्द नहीं किया गया। यही वजह है कि यहां आज तक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति नहीं हो सकी और न ही किसी प्रकार की चिकित्सा सेवा शुरू हो पाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से उपयोग नहीं होने के कारण भवन की स्थिति लगातार जर्जर होती जा रही है। करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति बेकार पड़ी है, जबकि क्षेत्र के लोगों को मामूली इलाज, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत सरकार के ई-पोर्टल पर दर्ज कराई है। साथ ही गोपालपुर के विधायक एवं ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को भी लिखित आवेदन देकर भवन को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कराने और यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कराने की मांग की है। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया कि संबंधित भवन अब तक स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है। विभाग के पास इस भवन से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों और संबंधित विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि 18 वर्षों से लंबित इस मामले का शीघ्र समाधान कर स्वास्थ्य उपकेंद्र को विभाग को विधिवत सौंपा जाए, ताकि यहां जल्द स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो सकें और क्षेत्र की जनता को इसका लाभ मिल सके।





