भागलपुर। श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले कांवड़िया पथ पर हर साल आस्था के अनोखे रंग देखने को मिलते हैं। कोई नंगे पांव यात्रा करता है, कोई दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ता है, तो कोई कठिन तपस्या के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर प्रस्थान करता है। इसी बीच कांवड़िया पथ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
लखीसराय जिले के रामचंद्रपुर निवासी सुबोध कुमार घुटनों के बल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। उनकी तपस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच से सात दिनों में वह केवल लगभग सात किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाए हैं। इसी गति से चलने पर उन्हें देवघर पहुंचने में दो महीने से अधिक समय लग सकता है। इस कठिन यात्रा में उनका बेटा हर पल उनके साथ है। वह पिता के आगे-आगे फोम बिछाता चलता है, ताकि घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कुछ कम हो सके। इसके बावजूद कुछ ही किलोमीटर की यात्रा में उनके दोनों घुटने बुरी तरह छिल चुके हैं और दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है।
असहनीय पीड़ा के बावजूद सुबोध कुमार का संकल्प अडिग है। उनका कहना है कि चाहे जितना समय लगे और कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, वह बाबा भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचकर ही दम लेंगे। कांवड़िया पथ पर उनकी यह कठिन साधना श्रद्धालुओं के लिए आस्था, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रतीक बन गई है। उनका मानना है कि महादेव की कृपा से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।





