पाकुड़: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर पाकुड़ नगर परिषद क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा ने सोमवार को पाकुड़ नगर स्थित कालीभसान परिसर के इस्कॉन मंदिर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सहित श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष सत्यवाग प्रभु ने जन्माष्टमी पर्व को लेकर मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़ी विभिन्न मांगें नगर परिषद उपाध्यक्ष के समक्ष रखीं। उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था कराने तथा जन्माष्टमी के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पानी के टैंकर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के बाद नगर परिषद उपाध्यक्ष राणा ओझा ने मौके पर मौजूद नगर परिषद के नगर मिशन प्रबंधक मनीष कुमार, कनिष्ठ अभियंता सुमन कुमार सहित अन्य कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर साफ-सफाई कराने, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा श्रद्धालुओं के लिए पानी की टंकी या पानी के टैंकर की व्यवस्था करने को कहा।
राणा ओझा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए नगर परिषद की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जाएंगी।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पर्व के दौरान साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। नगर परिषद का उद्देश्य धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
नगर परिषद उपाध्यक्ष ने कहा कि जन्माष्टमी पर्व को लेकर मंदिर परिसर में की जा रही तैयारियों की लगातार निगरानी की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने संबंधित कर्मियों को निर्देश दिया कि पर्व से पहले सभी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से पूरा कर लिया जाए, ताकि पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।





