जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत महेशपुर पंचायत में एक पुल पिछले तीन-चार वर्षों से अधूरे ढांचे के रूप में खड़ा है। पंचकोनिया गांव के पास बनाए गए इस पुल का एप्रोच रोड नहीं बनने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को आने-जाने के लिए करीब 3 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
पुल के सामने खेतों से होकर गुजरने वाला रास्ता महेशपुर पंचायत को निमौल पंचायत से जोड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल दो पंचायतों की सीमा पर स्थित होने के कारण जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। इसका खामियाजा आसपास के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पुल एक बरसाती नदी के ऊपर बनाया गया था। बारिश के मौसम में नदी में काफी पानी जमा हो जाता है और कई महीनों तक जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में पुल का निर्माण पूरा नहीं होने और एप्रोच रोड नहीं बनने से ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि महेशपुर पंचायत की ओर रोजाना आने-जाने वाले लोगों को करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ता है। पुल का निर्माण पूरा होने से आसपास के कई गांवों के लोगों को सीधा आवागमन का रास्ता मिल सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब चार साल पहले बनाए गए इस पुल की ऊंचाई भी काफी कम है। बरसात के दिनों में पानी पुल के ऊपर तक पहुंच जाता है, जिससे आवागमन और भी मुश्किल हो जाता है।
किसानों ने बताया कि खेती से जुड़े सामान लाने और फसल को बाजार तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। खासकर बारिश के मौसम में समस्या और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक इस रास्ते से करीब 8 से 10 गांवों के लोग आवागमन करते हैं। यदि पुल का निर्माण पूरा कर एप्रोच रोड बना दिया जाए तो आधे दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की आवागमन संबंधी समस्या दूर हो सकती है।
ग्रामीणों ने पुल के अधूरे निर्माण पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार का नतीजा बताया। उनका कहना है कि यदि पुल के पूर्ण निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई थी, तो अब तक निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मामले की जांच कर पुल का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की है।
वहीं इस मामले में पुल निर्माण निगम, कटिहार के कार्यपालक अभियंता से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि इस पुल का निर्माण उनके विभाग द्वारा नहीं कराया गया है। इससे अब पुल के निर्माण और इसके लिए जिम्मेदार विभाग को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।





