भागलपुर: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ का भागलपुर संग्रहालय में विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, भागलपुर सह सहायक संग्रहालय अध्यक्ष अंकित रंजन ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षक आकाश मिश्रा, वादन के प्रशिक्षक ऋषि मिश्रा, कथक की प्रशिक्षक राजकुमारी चंद्रकांता यादव तथा स्क्रीन प्रिंटिंग के प्रशिक्षक उदय कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंकित रंजन ने कहा कि कला केवल कौशल सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि कल्पना, संवेदना और विचारों को अभिव्यक्त करने की सशक्त भाषा है। युवाओं में अपार रचनात्मक ऊर्जा है और उन्हें उचित मार्गदर्शन, अभ्यास तथा प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलना जरूरी है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कला सीखते समय प्रयोग करने से घबराना नहीं चाहिए। निरंतर अभ्यास, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच कलाकार को अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि भागलपुर संग्रहालय को केवल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के तहत विभिन्न कला एवं शिल्प विधाओं में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रथम चरण में 25 से 29 सितंबर तक स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्रतिभागियों को स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीक, डिजाइन निर्माण, रंग संयोजन और प्रिंट तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद 6 से 10 अक्टूबर तक मंजूषा चित्रकला प्रशिक्षण तथा 12 से 16 अक्टूबर तक सिक्की कला प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक कला एवं शिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने और स्थानीय कला परंपराओं में रचनात्मक नवाचार को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ कला सीखने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने भी कार्यशाला की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय की ओर से बताया गया कि कार्यशाला श्रृंखला का उद्देश्य युवाओं को कला, संस्कृति, लोक परंपरा और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए उनकी प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना है। इसके साथ ही पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण और उनके समकालीन प्रयोग को बढ़ावा देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।





