टीएसी की बैठक आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे शामिल, बीजेपी ने बनाई दुरी ,यह है बजह 

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रांची : आदिवासियों की लघु सांसद  कही जाने वाली जनजातीय परामर्शदातृ पर्षद (टीएसी) की बैठक बुधवार, 21 मई को निर्धारित है। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे।इस बैठक से बीजेपी  ने दूरी बना ली है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल के अधिकारों को दरकिनार कर टीएसी का गठन किया गया है। पूर्व में भी भाजपा टीएसी की बैठक का बहिष्कार करती रही है। आदिवासियों के विविध मसले पर होने वाली बैठक से भाजपा की दूरी ने सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को भाजपा पर प्रहार करने का हथियार दे दिया है। झामुमो आदिवासियों की अनदेखी का आरोप भाजपा पर लगाती रही है। चुनावों में बीजेपी आदिवासी सुरक्षित सीटों पर बुरी तरह पिट चुकी है। पिछले वर्ष संपन्न लोकसभा चुनाव में सभी पांच आदिवासी सुरक्षित सीटों पर बीजेपी  को हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी  का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। 28 में से सिर्फ एक आदिवासी सुरक्षित सीट पर बीजेपी  प्रत्याशी को सफलता मिली। टीएसी की बैठक से भाजपा की दूरी पर झामुमो ने कहा है कि बीजेपी  का कदम आश्चर्यजनक नहीं है।झामुमो महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को आदिवासियों-मूलवासियों से परेशानी है। आदिवासी हित की बजाय इनकी नजर सिर्फ आदिवासियों की जमीन पर रहती है। यही कारण है कि रघुवर दास के शासनकाल में सीएनटी-एसपीटी एक्ट से छेड़छाड़ की कोशिश की गई। प्रबल विरोध के कारण भाजपा अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाई।   पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा है कि बीजेपी ने आदिवासी परामर्शदातृ समिति (टीएसी) की बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।टीएसी का गठन सदैव राज्यपाल के संरक्षण में करने की परंपरा रही है, जिसे इस राज्य सरकार ने तोड़ दिया है। कहने को तो यह संस्था आदिवासियों के हित में निर्णय लेकर सरकार को परामर्श देने के लिए बनी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में टीएसी की बैठकों का कुछ खास परिणाम नहीं दिख रहा है।टीएसी में सरकार के पास बहुमत है, लेकिन फिर भी कई वर्षों से पेसा समेत आदिवासी समाज के कई मामलों का फंसे रहना सरकार के ढुलमुल रवैये को दर्शाता है। टीएसी की बैठक में पहला मुद्दा आदिवासी बहुल गांवों में शराब की दुकानें एवं बार खोलने का लाइसेंस देने का है। सोरेन ने कहा कि अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत ही मैंने नशा विरोधी मुहिम से की थी।जिस बैठक में झारखंड की युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेलने के दस्तावेजों पर मुहर लगाई जा रही हो, उसमें शामिल होना मेरे लिए संभव नहीं है।
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Author: kelanchaltimes

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