ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने नारायणपुर में असंगठित मजदूरों के साथ बैठक आयोजित की। इसकी अध्यक्षता राजकुमार पंडित ने की। मुख्य वक्ता मुकेश मुक्त ने लेबर कोड कानून को मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा बताया और इसे कॉरपोरेट परस्त करार दिया। बैठक में महंगाई, बेकारी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में मजदूर शामिल हुए।
मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए लामबंद: नारायणपुर में ऐक्टू की बैठक
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के मई अभियान के 30वें दिन शाहकुंड के नारायणपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। स्थानीय पंचायत भवन परिसर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता भूलनी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार पंडित (मुन्ना जी) ने की। बैठक में निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों और अन्य असंगठित श्रमिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जहाँ मुख्य रूप से सरकार की नीतियों और मजदूरों के घटते अधिकारों पर चर्चा की गई।
लेबर कोड कानून: मजदूरों के लिए एक बड़ी चुनौती
बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए लेबर कोड कानून मजदूरों के बुनियादी अधिकारों पर सीधा हमला हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून केवल कॉरपोरेट घरानों और अमीरों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा, “सरकार की साजिश अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है। यह कानून मजदूरों को मिलने वाली मामूली सामाजिक सुरक्षा को भी छीन लेने वाला है।”
महंगाई और बेकारी के दौर में अस्तित्व की लड़ाई
मुकेश मुक्त ने आगे कहा कि देश में महंगाई और बेकारी ने पहले ही गरीब मजदूरों का जीना दूभर कर दिया है। ऐसे में सरकार को राहत के उपाय करने चाहिए थे, लेकिन इसके उलट वह मजदूरों के कानूनी अधिकारों को खत्म करने पर उतारू है। उन्होंने सभी उपस्थित मजदूरों से आह्वान किया कि इस देश को बेचने वाली और कॉरपोरेट समर्थित नीतियों के खिलाफ एक सशक्त लड़ाई शुरू करने की आवश्यकता है।
बैठक में दिखी एकजुटता
इस बैठक में जिला संयुक्त सचिव राजेश कुमार, दिनेश कपरी और सकलदेव प्रसाद सिंह सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ‘बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन’ और ‘असंगठित कामगार महासंघ’ से जुड़ी बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर मौजूद रहे। बैठक में पूनम देवी, बबलू प्रसाद सिंह, सतीश दास, मंटू दास, यशोदा देवी, सुबोध कुमार, रीता देवी और विभाष कुमार जैसे दर्जनों स्थानीय कार्यकर्ता और श्रमिक शामिल हुए, जिन्होंने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और संघर्ष करने का दृढ़ संकल्प दोहराया।






