गोड्डा: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DALSA) के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार और सचिव दीपक कुमार के निर्देश पर बुधवार को जिले के विभिन्न प्रखंडों में विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य गंभीर अपराधों से प्रभावित महिलाओं को झारखंड पीड़ित प्रतिकर (संशोधन) स्कीम 2019 के तहत उनके अधिकारों और पुनर्वास के प्रावधानों की जानकारी देना था।
पुनर्वास और आर्थिक सहायता पर जोर
पोड़ैयाहाट प्रखंड के मानिकपुर गांव में आयोजित शिविर के दौरान डालसा टीम (मो. हसीब और शंकर चंद्र सेन) ने ग्रामीणों को बताया कि यह योजना हिंसा, दुष्कर्म और एसिड अटैक जैसी घटनाओं से पीड़ित महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच है। योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
त्वरित वित्तीय सहायता: पीड़ित या उनके आश्रितों को निर्धारित सीमा तक आर्थिक मुआवजा।
पुनर्वास: पीड़ित को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर प्रदान करना।
गोपनीयता: आवेदन की प्रक्रिया में पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता बरती जाती है।
कैसे लें योजना का लाभ?
विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावित महिलाएं या उनके परिजन सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद एक प्रारंभिक जांच और अनुशंसा की जाती है, जिसके आधार पर मुआवजा राशि स्वीकृत होती है। इसकी प्रभावी निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है।
व्यापक स्तर पर अभियान
जागरूकता का यह कार्यक्रम केवल पोड़ैयाहाट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गोड्डा, सुंदरपहाड़ी, पथरगामा, बसंतराय, महागामा, मेहरमा, ठाकुरगंगटी और बोआरीजोर जैसे सुदूर प्रखंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी चलाया गया ताकि न्याय की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके।




