विश्व पर्यावरण सप्ताह के तहत उधवा झील पक्षी आश्रयणी में स्वच्छता अभियान, पौधारोपण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। वनकर्मियों ने झील क्षेत्र से प्लास्टिक एवं कचरा हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। स्थानीय ग्रामीणों और आगंतुकों को आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने उधवा झील को पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि बताते हुए इसकी स्वच्छता और संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया।
उधवा झील में पर्यावरण संरक्षण का संदेश, स्वच्छता और हरियाली बढ़ाने को चला विशेष अभियान
उधवा : विश्व पर्यावरण सप्ताह के अवसर पर झारखंड की प्रसिद्ध उधवा झील पक्षी आश्रयणी में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों, वनकर्मियों तथा स्थानीय लोगों ने मिलकर स्वच्छता अभियान चलाया, पौधारोपण किया और लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।
स्वच्छता अभियान से दिया स्वच्छ पर्यावरण का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत झील क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता अभियान के साथ हुई। सुबह से ही वनकर्मी एवं सहयोगी उधवा झील के किनारों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई में जुट गए। अभियान के दौरान प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाकर झील परिसर को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण कदम है। झील क्षेत्र में फैला कचरा न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को प्रभावित करता है, बल्कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए सभी लोगों को स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
पौधारोपण कर बढ़ाया गया हरित आवरण
स्वच्छता अभियान के साथ-साथ आश्रयणी परिसर और उसके आसपास चयनित स्थलों पर पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। वनकर्मियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाना तथा पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक पेड़-पौधे न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं, बल्कि पक्षियों और वन्य जीवों के लिए भी अनुकूल आवास उपलब्ध कराते हैं। इसी सोच के साथ पर्यावरण सप्ताह के दौरान पौधारोपण को विशेष महत्व दिया गया।
ग्रामीणों और पर्यटकों को किया गया जागरूक
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्थानीय ग्रामीणों और झील घूमने आने वाले आगंतुकों के साथ संवाद रहा। इस दौरान लोगों को आर्द्रभूमियों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आर्द्रभूमियां प्राकृतिक जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। लोगों से अपील की गई कि वे झील क्षेत्र में कचरा न फैलाएं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
पक्षी संरक्षण में समुदाय की भूमिका अहम
जागरूकता कार्यक्रम में पक्षी संरक्षण के महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि उधवा झील हर वर्ष हजारों स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल बनती है। ऐसे में झील की स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है।
वनकर्मियों ने कहा कि यदि स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से संरक्षण कार्यों में भागीदारी निभाए तो इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। लोगों को पक्षियों को नुकसान न पहुंचाने और उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखने का संदेश भी दिया गया।
पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है उधवा झील
वन विभाग के अनुसार उधवा झील पक्षी आश्रयणी केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की प्रमुख आर्द्रभूमियों में शामिल है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी सर्दियों के मौसम में पहुंचते हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों से ही उधवा झील जैसी प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकता है।





