प्रवीण कुमार, आजमनगर (कटिहार)। शिक्षक विप्लव कुमार ने विद्यालय स्तर पर शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता को जोड़ते हुए कई बालिकाओं को बाल विवाह से बचाने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है। इसके लिए उन्होंने विद्यालय के मीना मंच, बाल संसद और बच्चों के समूहों को जागरूकता अभियान का माध्यम बनाया।
विद्यालय में नुक्कड़ नाटक, संवाद और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए बाल विवाह के दुष्परिणामों और बालिका शिक्षा के महत्व को सामने रखा गया। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखने का अवसर मिला। संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि कम उम्र में विवाह बालिकाओं के विद्यालय छोड़ने यानी ड्रॉपआउट की एक बड़ी वजह बन रहा है।
इसके बाद विप्लव कुमार ने संबंधित बालिकाओं के माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। उन्होंने अभिभावकों को बताया कि बेटियों की पढ़ाई रोककर कम उम्र में विवाह करने से उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं। उन्होंने बालिकाओं को पढ़ाई जारी रखने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
लगातार संवाद और समझाइश का सकारात्मक परिणाम सामने आया। कई बालिकाओं का बाल विवाह रुक सका और उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। आज इनमें से कई लड़कियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
विप्लव कुमार ने कहा कि बाल विवाह रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता और संवाद है। जब बच्चों को अपनी बात कहने का अवसर मिलता है और परिवार उनकी बात समझता है, तब बदलाव संभव होता है।





