पाकुड़। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे की अदालत ने मंगलवार को मारपीट के गंभीर मामले में एक ही परिवार के चार सदस्यों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में 22 वर्षीय जुड़वां भाई रिपन शेख और सीपन शेख, उनकी बहन लालपी बीबी तथा मां कालो बीबी शामिल हैं। सभी पाकुड़ मालपहाड़ी ओपी थाना क्षेत्र के सीतापहाड़ी गांव के निवासी हैं।
न्यायालय ने चारों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की एक अन्य धारा में भी तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत के आदेश के अनुसार 10-10 हजार रुपये का जुर्माना जमा नहीं करने पर प्रत्येक दोषी को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा। वहीं दूसरी धारा में निर्धारित दो-दो हजार रुपये का जुर्माना नहीं देने पर सभी को अतिरिक्त दो माह जेल में रहना होगा।
2023 में हुई थी मारपीट की घटना
मामला 22 नवंबर 2023 की रात का है। घटना में गंभीर रूप से घायल पति-पत्नी को इलाज कराने में समय लग गया। इसके बाद अकीदा बीबी ने 16 दिसंबर 2023 को पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने उसी दिन थाना कांड संख्या 233/2023 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, अकीदा बीबी ने पुलिस को बताया था कि दूसरे पक्ष के पड़ोसी उनके घर के पास स्थित उनकी जमीन पर कचरा और अन्य प्रकार की गंदगी फेंकते थे। इसका विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोग गाली-गलौज करने लगे और बाद में रिपन शेख, सीपन शेख, लालपी बीबी और कालो बीबी ने पति-पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि चारों आरोपितों ने लाठी-डंडे और नुकीले पदार्थ से दोनों पर हमला किया। हमले में पति की हालत गंभीर होते देख पत्नी अकीदा बीबी भागकर अपने घर के अंदर चली गई, लेकिन आरोपितों ने उसका पीछा किया और घर के अंदर घुस गए। प्राथमिकी के अनुसार, इस दौरान एक आरोपित ने अकीदा बीबी के पेट में लात मारी। उस समय वह गर्भवती थी।
गंभीर हालत में पश्चिम बंगाल रेफर किया गया था पति
घटना में घायल पति-पत्नी को ग्रामीणों की मदद से पाकुड़ सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। इसके बाद पति जब्बार शेख की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें पश्चिम बंगाल के एक अस्पताल में रेफर कर दिया था।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपितों को दोषी पाया। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे की अदालत ने चारों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। दूसरी धारा में भी तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास का दंड दिया गया।




