पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर दिखी मानवीय संवेदना, बाबूलाल मरांडी ने व्हीलचेयर पर बैठे वरिष्ठ नेता से की मुलाकात

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पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी और पूर्व विधायक बेणी प्रसाद गुप्ता के बीच आत्मीय मुलाकात हुई। मरांडी शुक्रवार को पार्टी कार्यक्रम के बाद रांची लौट रहे थे, तभी स्टेशन पर व्हीलचेयर पर मौजूद बेणी प्रसाद गुप्ता पर उनकी नजर पड़ी। उन्होंने तुरंत उनके पास पहुंचकर न केवल स्वास्थ्य का हाल जाना, बल्कि सम्मानपूर्वक आत्मीयता भी जताई। यह भावुक दृश्य राजनीति में मानवीय मूल्यों का एक बड़ा उदाहरण बना।

राजनीति में सम्मान और आत्मीयता की मिसाल: पाकुड़ स्टेशन पर मिले दो दिग्गज

झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी की पाकुड़ रेलवे स्टेशन की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सराहना बटोर रही है। शुक्रवार को पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, जब मरांडी वनांचल एक्सप्रेस के इंतजार में स्टेशन पर थे, तब उनकी मुलाकात पूर्व विधायक बेणी प्रसाद गुप्ता से हुई। बेणी प्रसाद गुप्ता, जो सक्रिय राजनीति से दूर हैं और स्वास्थ्य कारणों से रांची जा रहे थे, स्टेशन पर व्हीलचेयर पर बैठे ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

अतीत की राजनीति और वर्तमान का सम्मान

जैसे ही बाबूलाल मरांडी की नजर अपने पुराने साथी और पाकुड़ में भाजपा को मजबूत आधार देने वाले बेणी प्रसाद गुप्ता पर पड़ी, वे अपना सारा प्रोटोकॉल छोड़कर उनके पास पहुंच गए। उन्होंने उनके कंधे पर हाथ रखकर आत्मीयता से उनका हालचाल जाना। यह मुलाकात इस बात का प्रमाण थी कि भले ही कोई राजनीति के सक्रिय मंच से दूर हो जाए, लेकिन वैचारिक और मानवीय संबंध सदैव जीवित रहते हैं।

प्रेरणादायक क्षण: राजनीति में मूल्यों का महत्व

स्टेशन पर मौजूद लोगों के लिए यह क्षण बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। लोगों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी राजनीति में जब अक्सर लोग समय के साथ वरिष्ठों को भूल जाते हैं, ऐसे में बाबूलाल मरांडी द्वारा दिखाया गया यह सम्मान वर्तमान पीढ़ी के लिए एक बड़ा संदेश है। यह केवल दो नेताओं की भेंट नहीं थी, बल्कि यह राजनीतिक जीवन में संबंधों और सम्मान के महत्व को दर्शाने वाला एक जीवंत उदाहरण था।

कार्यकर्ताओं ने की सराहना

इस भेंट के दौरान भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अमृत पांडेय और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी वहां मौजूद थे। सभी ने इस दृश्य को ‘राजनीति का एक मानवीय चेहरा’ करार दिया। मरांडी का यह व्यवहार साबित करता है कि वे आज भी उन कार्यकर्ताओं और नेताओं का पूरा सम्मान करते हैं जिन्होंने कठिन दौर में संगठन को सींचने का काम किया था। यह घटना पाकुड़ ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।

rohini shree
Author: rohini shree

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