पीएचईडी के विशेष अभियान में 78 चापाकल दुरुस्त, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था हुई मजबूत

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भागलपुर जिले में पीएचईडी द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत 78 खराब चापाकलों की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू किया गया। इसके लिए 31 मरम्मति दलों को लगाया गया था। अभियान के दौरान सात पूरी तरह खराब चापाकलों की पहचान भी की गई, जिनके प्रतिस्थापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग ने कहा कि गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

 

विशेष अभियान के तहत चापाकलों की मरम्मत तेज

भागलपुर जिले में गर्मी के मौसम के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से निपटने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बिहार सरकार के निर्देशों के अनुरूप लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर पूर्वी एवं पश्चिमी की ओर से खराब पड़े चापाकलों की पहचान कर उनकी मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसी कड़ी में 4 जून 2026 को जिले के विभिन्न प्रखंडों में व्यापक मरम्मत अभियान चलाकर 78 चापाकलों को पुनः चालू किया गया।

31 मरम्मति दलों को लगाया गया मैदान में

विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 31 मरम्मति दलों की तैनाती की गई थी। इन टीमों ने अलग-अलग प्रखंडों में जाकर खराब चापाकलों की जांच की और आवश्यक मरम्मत कर उन्हें फिर से चालू कराया। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी राहत मिली है, जिन्हें पेयजल के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

सात डिफंक्ट चापाकलों की पहचान

अभियान के दौरान सात ऐसे चापाकल भी चिन्हित किए गए जो पूरी तरह से खराब हो चुके हैं और सामान्य मरम्मत से चालू नहीं हो सकते। विभाग ने इन डिफंक्ट चापाकलों के प्रतिस्थापन और आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इन स्थानों पर जल्द ही नई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि लोगों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।

शाहकुंड और गोराडीह में सबसे अधिक मरम्मत

प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार शाहकुंड और गोराडीह प्रखंड में सबसे अधिक चापाकलों की मरम्मत की गई। शाहकुंड में नौ और गोराडीह में आठ खराब चापाकलों को दुरुस्त कर पुनः चालू किया गया। इसके अलावा जगदीशपुर, सुल्तानगंज, कहलगांव, नाथनगर सहित अन्य प्रखंडों में भी मरम्मत कार्य किया गया, जिससे हजारों ग्रामीणों को राहत मिली।

गर्मी में बढ़ी पेयजल की आवश्यकता

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि चापाकल खराब हो जाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसी कारण विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और प्राप्त शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

शिकायतों के त्वरित निष्पादन पर जोर

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों से मिलने वाली शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। प्रत्येक खराब चापाकल की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार मरम्मति दलों को मौके पर भेजा जा रहा है। इससे लोगों को कम समय में राहत मिल रही है और पेयजल व्यवस्था सुचारू बनी हुई है।

निर्बाध पेयजल आपूर्ति लक्ष्य

पीएचईडी का मुख्य उद्देश्य जिले के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि नियमित रखरखाव और त्वरित मरम्मत के माध्यम से जलापूर्ति संबंधी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी दिशा में यह विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा।

ग्रामीणों को मिल रही राहत

चापाकलों की मरम्मत से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने विभाग की पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह समय पर कार्रवाई होती रहेगी। विभाग ने आश्वासन दिया है कि पेयजल से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अभियान निरंतर जारी रहेगा।

rohini shree
Author: rohini shree

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