भागलपुर: राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन स्कीम (यूपीएस) के विरोध में सरकारी कर्मियों ने मंगलवार को देशभर में काला दिवस मनाया। ऐक्टू ने भी काला दिवस का समर्थन करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने पुरानी पेंशन को सरकारी कर्मियों का हक बताते हुए कर्मचारियों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों को छीन रही है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु तक देश और राज्य की सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को उनके बुढ़ापे के सहारे से वंचित कर दिया गया है।
कॉमरेड मुकेश मुक्त ने कहा कि वर्ष 2004 में तत्कालीन केंद्र की वाजपेयी सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) को समाप्त कर सरकारी कर्मियों के बुढ़ापे को खतरे में डाल दिया। उन्होंने एनपीएस और यूपीएस को कर्मचारियों के भविष्य के साथ छल बताया।
उन्होंने कहा कि शेयर बाजार पर आधारित पेंशन स्कीम कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं रख सकती। पुरानी पेंशन ही सरकारी कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक सम्मान की गारंटी है।
मुकेश मुक्त ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार एनपीएस और यूपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह बहाल नहीं करती, तब तक कर्मचारियों के समर्थन में संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से सरकारी कर्मियों के हित में जल्द पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की।





