घाटशिला। बांग्ला भाषा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के केंद्रीय संयुक्त सचिव सह गौरीकुंज उन्नयन समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी को सम्मानित किया गया। निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की पश्चिम बंगाल स्थित रूपनारायणपुर शाखा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव अनिल धार एवं रूपनारायणपुर शाखा की सचिव रूमा चौधरी ने तापस चटर्जी को अंगवस्त्र, गुलदस्ता एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। आयोजकों ने बांग्ला भाषा के संरक्षण, संवर्धन तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की। विशेष रूप से घाटशिला में संचालित ‘अपूर पाठशाला’ के माध्यम से बच्चों को मातृभाषा से जोड़ने के उनके प्रयास को उल्लेखनीय बताया गया।
गौरतलब है कि झारखंड राज्य गठन के बाद बांग्ला भाषा के शिक्षकों एवं पाठ्य-पुस्तकों की कमी के कारण बांग्लाभाषी बच्चों का अपनी मातृभाषा से जुड़ाव लगातार कमजोर होने लगा था। इस समस्या को दूर करने और बच्चों को बांग्ला भाषा एवं साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से घाटशिला के दाहीगोड़ा स्थित गौरीकुंज में 12 सितंबर 2018 को ‘अपूर पाठशाला’ की शुरुआत की गई थी। इस पहल का नेतृत्व तापस चटर्जी ने किया।
12 सितंबर का दिन बांग्ला के प्रसिद्ध साहित्यकार विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय की जयंती से भी जुड़ा है। इसी अवसर को यादगार बनाते हुए शुरू की गई ‘अपूर पाठशाला’ के माध्यम से बच्चों को बांग्ला भाषा की शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें अपनी मातृभाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद तापस चटर्जी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि घाटशिला, उन्नयन समिति से जुड़े सदस्यों एवं उनके परिवारों तथा पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से समाज के प्रति और अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करने की प्रेरणा मिली है।
उन्होंने कहा कि सम्मान ने उनके भीतर तथा समिति के सदस्यों में समाजहित के कार्यों को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का उत्साह पैदा किया है। बांग्ला भाषा और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे निरंतर कार्य जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि समाजसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह आगे भी कायम रहेगी।
सम्मान मिलने से तापस चटर्जी के समर्थकों, उन्नयन समिति के सदस्यों एवं बांग्लाभाषी समाज में भी हर्ष का माहौल है।




