
भागलपुर: कबीर जयंती के अवसर पर भागलपुर के कला केंद्र में ‘ढाई आखर प्रेम का’ कार्यक्रम का आयोजन पीस सेंटर और परिधि के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में कबीर के दोहे, साखी, कुंडलियां और निर्गुण भजनों के माध्यम से प्रेम, मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए राहुल ने कहा कि कबीर केवल संत या कवि ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक, धर्म सुधारक और दार्शनिक भी थे। उन्होंने कहा कि कबीर ने धार्मिक पाखंड और कर्मकांड का विरोध करते हुए प्रेम, समानता और मानवता को जीवन का मूल मंत्र बताया।
वक्ताओं ने कबीर के प्रसिद्ध दोहों और विचारों के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उदय ने कहा कि सच्चा ज्ञान पुस्तकों से नहीं, बल्कि प्रेम के मर्म को समझने से प्राप्त होता है। वहीं डॉ. मनोज ने प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानव समाज के प्रति प्रेम को जीवन का आधार बताया।
डॉ. नीरज ने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने अहंकार को समाप्त नहीं करेगा, तब तक प्रेम का विस्तार संभव नहीं है। वहीं डॉ. योगेंद्र ने धर्म के नाम पर फैल रहे पाखंड और सामाजिक भेदभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कबीर के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम में संगीत शिक्षक विनय कुमार भारती के संयोजन में कबीर संगीत की प्रस्तुति दी गई। नाल पर प्रमोद जी ने संगत की, जबकि विनय कुमार भारती, मन सतसंगी, प्रेरणा स्वरूप, कृतिका मंजरी, रूपम कुमारी, वीणा, दीक्षा, चंदन, विशाल, सृष्टि और लक्ष्मी सहित कई कलाकारों ने निर्गुण भजनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर ऐनुल होदा, डॉ. उमेश प्रसाद नीरज, डॉ. मनोज, तकी अहमद जावेद, सुषमा, मो. बाकिर, ललन, उज्ज्वल कुमार घोष, वीर शिवाजी, स्वेता शंकर, डॉ. सुनील अग्रवाल, कोमल, रेखा, जय प्रकाश कुमार, मुनीलाल सिंह, अभिजीत शंकर सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार और समाजसेवी उपस्थित रहे।

