मंथन : आपकी असली जरूरत क्या है!

Facebook
Twitter
WhatsApp
Telegram

Humanity DESK : ‘‘जरूरत’’ एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई परिचित है। बिना जरूरत – बिना आवश्यकता जीवन का एक दिन भी निर्वहन नहीं हो सकता इसलिए कहा जाता है कि ‘‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है।‘‘ जब मनुष्य को जरूरत महसूस हुई, तभी उसने उन सब चीजों को खोजा, जिससे उसकी वह जरूरत पूरी हो सके। जरूरत के बारे में समझिए कि जरूरत क्या होती है और किसको किसकी जरूरत है ? अपनी जिन्दगी में यह बात समझना बहुत जरूरी है कि किसको किसकी जरूरत है ? पानी को मछली की जरूरत नहीं है बल्कि मछली को पानी की जरूरत है। यह समझना बहुत जरूरी है क्योंकि जब मछुआरा पानी में जाल को डालता है तो जाल निकालने पर भले ही पानी मछली से अलग हो जाए, परंतु तब भी मछली को पानी का मोह इतना सताता है कि वह उसके बिना जान दे देती है। पानी को मछली से कोई प्रेम नहीं है वह निरंतर गतिशील है। उसी प्रकार आप भी इस बात को समझिए कि आपको किसकी जरूरत है। क्या कभी आपने बैठकर यह सोचा है कि आपकी असली जरूरत क्या है ? जरूरतों को पूरा करने की व्यवस्था में लग गये पर यह कभी नहीं सोचा कि मेरा जीवन है, मैं जिंदा हूँ। मेरे अंदर स्वांस आता है और जाता है। एक सीमित समय है, जब तक मैं जीवित रहूंगा। इसके बाद मैं यहां नहीं रहूंगा। हमें नहीं मालूम कि वह समय कब आएगा, पर इतना जरूर मालूम है कि आएगा। जब तक हम जीवित हैं, हमारी असली जरूरत क्या है ? हमारा हृदय क्या मांग रहा है ? हमारा हृदय किस बात को अपनी जरूरत मानता है ? अपने जीवन में कम से कम जो हम यहां आये हैं तो अपनी असली जरूरत को तो पूरा करके जायें। सारी जरूरतें कभी पूरी नहीं होंगी। मनुष्य चाहे कितना भी परिश्रम कर लें, वह अपनी सारी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। तो कम से कम एक मुख्य जरूरत तो जरूर होगी, जिसको वह पूरा कर सकता है। मनुष्य की कुछ ऐसी जरूरतें होती हैं जो किसी चीज की पाबंदी नहीं मानती है। जिनको अगर मनुष्य रोकना भी चाहे तो उन्हें रोक नहीं सकता है। उसका संबंध इस बात से नहीं है कि मनुष्य पढ़ा-लिखा है या अनपढ़। शांति की जरूरत भी ऐसी ही जरूरत है, वह अंदर की जो पुकार है वह कभी किसी की परवाह नहीं करती। चाहे कोई भी हो, पर उसके अंदर की आवाज आती रहती है। परंतु मनुष्य उसको अनसुना करने की कोशिश करता है। प्रेम रावत जी कहते हैं कि जिस चीज की आपको जरूरत है वह तो आपके ही अंदर है। मैं चाहता हूँ कि आप अपनी जिंदगी के अंदर उस जरूरत को स्वयं समझें और उसका अनुभव करें। जब तक हमको इस संसार के अंदर रहते हुए उस शांति का खुद अनुभव नहीं होगा तब तक हम समझ नहीं पायेंगे कि हमको क्या मिला है, इसलिए उस बनाने वाले ने मनुष्य के अंदर उस शांति की प्यास डाली है। लोग समझते हैं कि अगर दो व्यक्ति लड़ रहे हैं और लड़ना बंद कर दें तो शांति हो जाएगी। यह शांति नहीं है। शांति वह असली जरूरत है जिसको जान लेने के बाद आपके जीवन में आनंद ही आनंद हो जाएगा। क्या आपने अपने जीवन में उस शांति का अनुभव किया है या नहीं ? अगर आपने उस शांति का अनुभव नहीं किया है तो कीजिए और अपने जीवन को सफल बनाइए। प्रेम रावत जी मानवता एवं शांति के विषय पर चर्चा करने वाले अन्तर्राष्ट्रीय वक्ता हैं। शान्ति को पाने की प्रेरणा देने के लिए विश्वभर में कई सरकारी और शिक्षण संस्थानों द्वारा उन्हें शांतिदूत की उपाधि प्रदान की गई है।

kelanchaltimes
Author: kelanchaltimes

Leave a Comment

Kelanchaltimes हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

और खबरें

नालसा संवाद योजना न्याय तक पहुंच मजबूत करने का प्रभावी माध्यम, ग्रामीणों को दी जानकारी

  गोड्डा जिले में झालसा के 90 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न प्रखंडों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। शिविर में ग्रामीणों को

सुंदरपहाड़ी प्रखंड कार्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर में 15 यूनिट रक्त संग्रहित, लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया भाग

  गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में कुल 15 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। शिविर में प्रखंड विकास

उधवा में झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन प्रेस प्रखंड इकाई का गठन, नई कार्यकारिणी का हुआ चयन

  उधवा झील सह पक्षी अभ्यारण्य स्थित गेस्ट हाउस परिसर में झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन प्रेस की बैठक आयोजित कर उधवा प्रखंड इकाई का गठन किया

जिला स्तरीय एडवोकेसी बैठक में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने पर व्यापक मंथन और चर्चा

  साहिबगंज में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी कार्यालय में आयोजित जिला स्तरीय एडवोकेसी बैठक में बाल संरक्षण तंत्र को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने पर