पटना: बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के रोजगार एवं नियोजन मेले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का रोजगार एवं नियोजन मेला हवा-हवाई साबित हो रहा है और रोजगार के दावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
डॉ. हिमांशु ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार 19 से 23 अगस्त तक आयोजित पटना जॉब केयर में 115 कंपनियों ने 20,206 युवाओं का रोजगार के लिए चयन किया है। उन्होंने मांग की कि सरकार यह सूची सार्वजनिक करे कि किन युवाओं को किस कंपनी में रोजगार मिला है और उन्हें हर महीने कितना वेतन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल रोजगार देने के आंकड़े जारी करना काफी नहीं है। चयनित युवाओं को नौकरी मिलने, उनके कार्यस्थल और वेतन से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।
डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने श्रम संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में लूट मची हुई है और कई जगह श्रमिकों से कम वेतन पर काम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मॉल, दुकानों, प्रतिष्ठानों और पेट्रोल पंपों पर काम करने वाले कई श्रमिकों को बैंक खाते के माध्यम से वेतन नहीं दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों को सात, आठ और नौ हजार रुपये देकर काम कराया जा रहा है। साथ ही उन्होंने श्रम संसाधन विभाग पर मोटी रकम वसूलने का भी आरोप लगाया।
डॉ. हिमांशु ने ईंट-भट्ठों में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वहां भी कई श्रमिकों से बिना उचित नियोजन के काम कराया जा रहा है और उनके खाते में वेतन का भुगतान नहीं किया जाता।
उन्होंने मुख्यमंत्री से रोजगार और श्रमिकों से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की। डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने कहा कि मुख्यमंत्री को बिना जांच के ऐसे बयान देने से बचना चाहिए और रोजगार के दावों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।





