सहरसा: वर्ष 2026 में पितृपक्ष पार्वण श्राद्ध की शुरुआत 27 सितंबर से होगी। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन, डॉ. रहमान चौक, सहरसा के संस्थापक एवं मिथिला-कोशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि 26 सितंबर को अगस्त्य अर्घ्यदान के बाद 27 सितंबर से पितृपक्षीय पार्वण श्राद्ध कर्म शुरू होगा। इसका समापन 10 अक्टूबर को आश्विन अमावस्या के साथ होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृपक्ष का विधान माना जाता है। उन्होंने बताया कि दिवंगत परिजनों का श्राद्ध उनकी देहावसान तिथि के अनुसार किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अपने पितृ की श्राद्ध तिथि की जानकारी नहीं हो, तो सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने का शास्त्रीय विधान बताया गया है।
पितृपक्ष के दौरान तिल, कुश और जल से तर्पण कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और उनके कल्याण की कामना की जाती है। पंडित तरुण झा ने बताया कि श्राद्ध कर्म और पिंडदान के लिए दिन का अपराह्न काल विशेष रूप से महत्वपूर्ण और उपयुक्त माना जाता है।
उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक कर्मों का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार इन कर्मों के माध्यम से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।





