लिट्टीपाड़ा प्रखंड के छोटा पोखरिया गांव में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में नब्बे दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान ग्रामीणों को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, बाल विवाह, बाल श्रम, घरेलू हिंसा, जादू-टोना प्रताड़ना तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने घर-घर पहुंचकर कानूनी सहायता सेवाओं और नागरिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक किया।
लिट्टीपाड़ा। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ द्वारा नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं नालसा की जागृति योजना 2025 के तहत व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कारमाटांड़ पंचायत अंतर्गत छोटा पोखरिया गांव में घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को विभिन्न कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं एवं विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी पहुंचाना है। अभियान के तहत पैरा लीगल वॉलंटियर जयंती टुडू ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर विभिन्न सामाजिक और कानूनी विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
अभियान के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि वरिष्ठ नागरिकों को कानून के तहत कई प्रकार के अधिकार और संरक्षण प्राप्त हैं। साथ ही उन्हें सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई, ताकि पात्र लाभुक इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
इसके अलावा बाल विवाह, बाल श्रम और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक समस्याओं के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से इस कुप्रथा को समाप्त करने में सहयोग की अपील की गई। बाल श्रम के खिलाफ भी जागरूकता फैलाते हुए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का संदेश दिया गया।
अभियान में जादू-टोना प्रथाओं के नाम पर होने वाले अत्याचारों और उत्पीड़न के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि किसी भी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं कानूनन दंडनीय अपराध हैं। साथ ही महिलाओं के अधिकारों और घरेलू हिंसा से संरक्षण संबंधी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई।
ग्रामीणों को सड़क दुर्घटनाओं के शिकार व्यक्तियों, प्राकृतिक आपदाओं तथा मानव निर्मित आपदाओं से प्रभावित लोगों को मिलने वाली कानूनी सहायता और सरकारी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा निःशुल्क कानूनी सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
अभियान के दौरान ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न कानूनी विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे। पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी साक्षरता बढ़ाने और लोगों को न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।





