शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल: विश्वभारती विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और केंद्रीय हिंदी निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘हिंदी पत्रकारिता का सफर : बदलती भाषा, बदलते तेवर’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। संगोष्ठी में देशभर से आए वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास से लेकर वर्तमान दौर में एआई, भाषा परिवर्तन, बाजारीकरण और कॉरपोरेट प्रभाव जैसी चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में ‘भाषा’ और ‘समागम’ पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि विश्वभारती के कुलसचिव डॉ. विकास कुमार मुखोपाध्याय की उपस्थिति में प्रो. मुक्तेश्वर नाथ तिवारी ने बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने ‘उदंत मार्तंड’ से लेकर डिजिटल युग तक हिंदी पत्रकारिता की जनपक्षधरता पर प्रकाश डाला। सत्र की अध्यक्षता प्रो. मृणाल कांति मंडल ने की। संचालन डॉ. सुभाष चन्द्र राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुकेश लोहार ने किया।
संगोष्ठी के प्रथम दिवस के वैचारिक सत्रों में जयदीप चटर्जी, डॉ. बिप्लब लौह चौधरी, डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री और डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने भारतीय नवजागरण, ‘वंदे मातरम’ के व्यापक अर्थ और निष्पक्ष पत्रकारिता के मूल्यों पर चर्चा की। दूसरे सत्र में डॉ. गणेश रजक, डॉ. श्रीकांत द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भारतीय वसंत कुमार और प्रो. हरिश्चंद्र मिश्र ने प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता और तटस्थता को रेखांकित किया।
पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन हुआ। संगीत भवन के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। डॉ. मनोज कुमार शर्मा के सितार वादन के साथ विश्वजीत साहू ने तबला वादन से युगलबंदी की। विभाग के विद्यार्थियों ने भी विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की।
संगोष्ठी के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. रामेश्वर मिश्र ने की। इस दौरान ‘दिनमान’ और ‘विशाल भारत’ जैसी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं के योगदान को याद किया गया। डॉ. उत्कर्ष सिन्हा और डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने घटती संपादकीय स्वायत्तता और मीडिया के बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता व्यक्त की। वहीं डॉ. मयंक भार्गव ने चैटजीपीटी और ‘अनुवादिनी ऐप’ जैसे एआई उपकरणों के दौर में समाचारों की सत्यता से जुड़े सवालों पर विचार रखा। डॉ. रंजना शर्मा ने हिंदी पत्रकारिता और भाषा पर ‘हिंग्लिश’ के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की।
दूसरे सत्र में प्रो. शकुन्तला मिश्र, डॉ. प्रमोद शर्मा, डॉ. राजीव रंजन प्रसाद, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. राजू कुमार और डॉ. श्रुति कुमुद ने कॉरपोरेट प्रभाव, प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में गिरावट, पूर्वोत्तर क्षेत्र की मीडिया में उपेक्षा और स्थानीय पत्रकारों के उत्पीड़न जैसे मुद्दों को उठाया।
तीसरा सत्र शोधार्थियों को समर्पित रहा, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भारतीय बसंत कुमार ने की। इस दौरान अमित कुमार, अमित सिंह, मम्पी शर्मा, शिवम कुमार, जेम्स हांसदा, निकिता कुमारी, अन्वेषा कबीरत्ना, बुधुराम बेहेरा, मानसी कुमारी, अमन कुमार होली और चिराग शर्मा ने विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।
दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या में विश्वभारती के परीक्षा विभाग में कार्यरत श्री रतन ओझा, संगीत भवन के शिल्प अध्यापक प्रभात जी, संगतकार के रूप में अनुभव चौधरी तथा अशोक ने संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया। विभाग के विद्यार्थियों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
अंत में डॉ. सुभाष चन्द्र राय, श्रीमती अनीता डगोरे और श्री हकीकत के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का आधिकारिक समापन हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश भगत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन किया गया।





