विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर नवीनगर पंचायत भवन में जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों के अधिकारों पर जोर

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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर नवीनगर पंचायत भवन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बाल श्रम, बाल विवाह, शिक्षा का अधिकार और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बाल श्रम को सामाजिक बुराई बताते हुए बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर बल दिया। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

 

पाकुड़। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) पाकुड़ के तत्वावधान में पाकुड़ प्रखंड के नवीनगर पंचायत भवन में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख, सहायक गंगाराम टुडू, एएसआई अनिल कुमार पंडित तथा पीसीआई-यूनिसेफ के जिला परियोजना समन्वयक मोहम्मद अनीस मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मो. नुकुमुद्दीन शेख और गंगाराम टुडू ने बताया कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस प्रत्येक वर्ष 12 जून को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल श्रम की समस्या के प्रति समाज को जागरूक करना तथा बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों को मजदूरी में लगाना न केवल उनके भविष्य के साथ अन्याय है बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना संबंधित विभाग को दें।
एएसआई अनिल कुमार पंडित ने बाल श्रम के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कम उम्र में मजदूरी करने वाले बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह बाल श्रम के खिलाफ आवाज उठाए।
कार्यक्रम के दौरान पीसीआई-यूनिसेफ के जिला परियोजना समन्वयक मोहम्मद अनीस ने बाल विवाह और बाल श्रम से संबंधित वीडियो क्लिप प्रदर्शित कर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि बच्चों का स्थान विद्यालय में है, न कि कार्यस्थल पर।
जागरूकता कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, पैरा लीगल वॉलंटियर्स चंद्रशेखर घोष, खुदू राजवंशी, विजय कुमार राजवंशी, नीरज कुमार राउत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने बाल श्रम और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने तथा बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
rohini shree
Author: rohini shree

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