समान काम, समान वेतन की लड़ाई में मील का पत्थर बना 1 सितंबर : नितेश कुमार

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ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के संघर्ष और समानता की ऐतिहासिक यात्रा को किया गया याद

गोड्डा: ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के लिए एक सितंबर का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है। एक सितंबर 1987 को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की ‘समान काम के लिए समान वेतन’ की मांग से जुड़े मामले पर विचार के लिए नेशनल इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (एनआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था। इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम की स्मृति में प्रत्येक वर्ष एक सितंबर को ग्रामीण बैंक समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस अवसर पर झारखंड ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव नितेश कुमार मिश्रा ने ग्रामीण बैंक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता दिवस उन कर्मचारियों के संघर्ष और एकजुटता की याद दिलाता है, जिन्होंने समान वेतन और सम्मानजनक सेवा शर्तों के लिए लंबे समय तक आंदोलन किया।

उन्होंने बताया कि एआईआरआरबीईए के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद 25 नवंबर 1987 को नेशनल इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल का गठन हुआ। न्यायमूर्ति एस. ओबुल रेड्डी की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने 30 अप्रैल 1990 को ऐतिहासिक अवार्ड दिया। इसके तहत ग्रामीण बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों को प्रायोजक बैंकों के तुलनीय कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते और अन्य लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। एनआईटी अवार्ड के अनुसार ये लाभ एक सितंबर 1987 से प्रभावी हुए।

नितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि समानता दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को यह समझाने का दिन भी है कि कर्मचारियों के अधिकार संगठन, एकता और निरंतर संघर्ष से हासिल होते हैं। उन्होंने संगठन की एकता को मजबूत बनाए रखने और संघर्ष की इस विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंक आज ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसानों, छोटे व्यवसायियों और ग्रामीण परिवारों तक बैंकिंग एवं ऋण सुविधाएं पहुंचाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस मौके पर ग्रामीण बैंक आंदोलन के श्रद्धेय नेता स्वर्गीय दादा दिलीप कुमार मुखर्जी के योगदान को भी याद किया गया।

बताया गया कि देश में पहले पांच क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना दो अक्टूबर 1975 को हुई थी। दो अक्टूबर 2026 को ग्रामीण बैंकों की स्थापना के 51 वर्ष पूरे होंगे। पांच दशक से अधिक की यात्रा में ग्रामीण बैंकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि समानता दिवस की ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा लेते हुए कर्मचारियों के जायज अधिकारों की रक्षा, संगठन की एकता और ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहना चाहिए।

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Author: kelanchaltimes

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