प्रवीण कुमार, कटिहार। स्वास्थ्य विभाग के सभाकक्ष में सिविल सर्जन-सह-सचिव की अध्यक्षता में सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, प्रोग्राम पदाधिकारियों और स्वास्थ्य पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में टीकाकरण, लेबर रूम, एनीमिया मुक्त भारत, परिवार नियोजन, किशोर स्वास्थ्य और रूटीन इम्यूनाइजेशन कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए।
लेबर रूम और टीकाकरण व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर
बैठक में टीकाकरण सत्रों पर एएनएम की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम एवं बीसीएम द्वारा नियमित क्षेत्र भ्रमण करने का निर्देश दिया गया। लेबर रूम में स्वच्छता, उपकरणों की उपलब्धता, ऑटोक्लेविंग, पर्याप्त प्रकाश, बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण और अभिलेखों के सही संधारण पर विशेष जोर दिया गया।
बारसोई और हल्का में लेबर रूम की व्यवस्था में कमी पाए जाने पर संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य प्रबंधक से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया गया। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में तीन दिनों के भीतर आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कर फोटोग्राफ के साथ अनुपालन प्रतिवेदन भेजने को कहा गया।
एनीमिया, परिवार नियोजन और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में तेजी
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत पोर्टल पर शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने, आईएफए टैबलेट के स्टॉक और वितरण की नियमित समीक्षा करने तथा आवश्यकता के अनुसार एनीमिक गर्भवती महिलाओं को एफसीएम उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का समय पर वितरण सुनिश्चित करने के साथ अंतरा इंजेक्शन के उपयोग को बढ़ाने का निर्देश दिया गया। वहीं डंडखोड़ा, कदवा, प्राणपुर और कुर्सेला में युवा क्लीनिक का संचालन एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया।
U-WIN और HMIS के आंकड़ों में अंतर दूर करने का निर्देश
रूटीन इम्यूनाइजेशन की समीक्षा के दौरान U-WIN और HMIS के आंकड़ों में अंतर को दूर करने तथा सही डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को कार्यक्रमों की नियमित निगरानी और डेटा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
सिविल सर्जन ने सभी प्रोग्राम पदाधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सतत निगरानी करने और सामने आने वाली कमियों के निराकरण की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही जिला स्तरीय साप्ताहिक समन्वय बैठक में सभी संबंधित पदाधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया।





