75 साल बाद भी विकास से वंचित छूरीधारी गांव, शुद्ध पानी और सड़क के लिए तरसे ग्रामीण

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लिट्टीपाड़ा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल छूरीधारी गांव में आज भी लगभग 300 ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में शुद्ध पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। ग्रामीण गंदे झरना कूप का पानी पीने को मजबूर हैं तथा बरसात में आवागमन और इलाज की समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने उपायुक्त से सड़क निर्माण और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

 

लिट्टीपाड़ा। आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कर्माटांड़ पंचायत अंतर्गत आदिम जनजाति बहुल छूरीधारी गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी काफी दूर है। लगभग 300 की आबादी वाला यह गांव आज भी शुद्ध पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पेयजल की सबसे बड़ी समस्या है। पूरे गांव की प्यास एक पुराने झरना कूप के सहारे बुझती है, जिसका पानी साफ नहीं माना जाता। ग्राम प्रधान जगदीश पहाड़िया सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरी में लोग इसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों के लिए करते हैं। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में यह पानी और अधिक दूषित हो जाता है, जिससे डायरिया तथा अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई ग्रामीण पहले भी बीमार पड़ चुके हैं, लेकिन सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
गांव की दूसरी बड़ी समस्या सड़क की है। छूरीधारी गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण उबड़-खाबड़ पगडंडियों के सहारे आवागमन करते हैं। बरसात के मौसम में ये रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों तथा प्रखंड मुख्यालय से लगभग कट जाता है। इसका सीधा असर छात्रों, किसानों और दैनिक कार्यों के लिए बाहर जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है और खराब सड़क के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को पहले खाट या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, जिसके बाद ही वाहन की व्यवस्था हो पाती है। कई बार इस देरी के कारण मरीजों की हालत और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और यदि जल्द ही सड़क तथा पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी समस्याएं और बढ़ जाएंगी। बारिश के दौरान गांव का संपर्क पूरी तरह बाधित होने की आशंका बनी रहती है।
ग्राम प्रधान जगदीश पहाड़िया ने उपायुक्त से गांव की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आदिम जनजाति बहुल यह गांव वर्षों से विकास की प्रतीक्षा कर रहा है। अब समय आ गया है कि प्रशासन ठोस पहल करते हुए पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि ग्रामीणों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।
rohini shree
Author: rohini shree

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