उधवा प्रखंड में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से जूझते लोगों के लिए ‘अमानत आजीविका महिला संकुल स्तरीय समिति’ की महिलाएं प्रेरणा बनी हैं। उत्तर पियारपुर स्थित स्कूल के समीप इन महिलाओं ने शीतल पेयजल सेवा केंद्र शुरू किया है, जहां राहगीरों, विद्यार्थियों और श्रमिकों को शुद्ध ठंडा पानी पिलाया जा रहा है। सीसी उत्पल दत्ता और आईपीआरपी अनन्त कुनाई के मार्गदर्शन में यह सेवा भाव ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग का एक अनूठा उदाहरण बन गया है।
मानवता की सेवा में जुटीं ‘आजीविका’ की दीदियां
झारखंड के उधवा प्रखंड में इन दिनों पारा लगातार चढ़ रहा है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऐसे में ‘अमानत आजीविका महिला संकुल स्तरीय प्राथमिक स्वावलंबी सहकारी समिति’ से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं मानवता की एक नई मिसाल पेश कर रही हैं। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में जहां लोग घरों से निकलने में कतरा रहे हैं, वहीं ये महिलाएं अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रही हैं।
पेयजल सेवा केंद्र से मिल रही राहत
समिति द्वारा उत्तर पियारपुर के अली बाबा रोज पब्लिक स्कूल के पास एक शीतल पेयजल सेवा केंद्र संचालित किया जा रहा है। यहां सीसी उत्पल दत्ता एवं आईपीआरपी अनन्त कुनाई के मार्गदर्शन में समूह की महिलाएं प्रतिदिन तैनात रहती हैं। सुबह से शाम तक ये ‘दीदियां’ राहगीरों, स्कूल से घर लौटते विद्यार्थियों, कड़ी मेहनत करने वाले श्रमिकों और स्थानीय ग्रामीणों को अपने हाथों से ठंडा और शुद्ध जल पिला रही हैं।
सामाजिक दायित्व और सशक्तिकरण का प्रतीक
यह पहल केवल प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण का भी एक सुंदर रूप है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में महिलाओं का यह कदम समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। समूह की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि सेवा का भाव मन में हो, तो वे हर कठिन परिस्थिति में समाज के लिए एक मजबूत स्तंभ बन सकती हैं।
पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश
केवल शीतल पेयजल ही नहीं, बल्कि ये महिलाएं लोगों को ‘जल संरक्षण’ के लिए भी जागरूक कर रही हैं। उनका स्पष्ट संदेश है—”स्वस्थ जल, स्वस्थ कल।” वे लोगों को समझा रही हैं कि जल जीवन का आधार है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। समिति के प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया है कि जब तक गर्मी का प्रकोप बना रहेगा, तब तक यह सेवा कार्य अनवरत जारी रहेगा।
सामुदायिक सहयोग की अनूठी पहल
यह अभियान ग्रामीण क्षेत्र में मानव सेवा और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। एक तरफ जहां पूरा देश बढ़ती गर्मी से परेशान है, वहीं उधवा की इन महिलाओं का सेवा-भाव लोगों को राहत के साथ-साथ प्रेरणा भी दे रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के छोटे-छोटे सेवा कार्य ही समाज में भाईचारे और संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। उधवा प्रखंड की इन महिलाओं की चहुंओर प्रशंसा हो रही है और उनका यह प्रयास अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।




