
लखीसराय: दलित शोषण मुक्ति मंच, लखीसराय के बैनर तले संरक्षक रंजीत कुमार अजीत और रामपाल मांझी के नेतृत्व में केआरके मैदान से जिला समाहरणालय तक प्रतिवाद मार्च निकाला गया। मार्च मुख्य बाजार होते हुए समाहरणालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा नालंदा जिले के राजगीर में पिंटू पासवान और सरवन पासवान की कथित तौर पर जाति पूछकर हत्या का मामला रहा। संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को फांसी की सजा, मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और एक-एक सरकारी नौकरी देने की मांग की।
इसके अलावा बेगूसराय के चकिया में एक दलित युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में भी दोषियों के खिलाफ स्पीड ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द फांसी की सजा देने की मांग उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड के सिंगारपुर गांव में मंदिर के नाम पर दलितों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया। साथ ही कुछ दलित नेताओं की चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए उनके खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
प्रतिवाद मार्च में दीपक वर्मा (डीवाईएफआई जिला अध्यक्ष), कपिल देव पासवान, मुकेश पासवान, गुटर मांझी, सुरेश मांझी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए।

