गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड की कदमा पंचायत अंतर्गत मेदनीचक गांव में 15वें वित्त आयोग की लगभग 52.10 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन उपस्वास्थ्य केंद्र विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष तकनीकी जांच कर गुणवत्ता की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक निर्माण दोबारा शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जहां उच्च क्षमता की सरिया लगनी चाहिए, वहां कम क्षमता वाली सरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा सीमेंट, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में भवन की मजबूती और लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
विरोध के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुंचे और कार्य बंद करा दिया। उन्होंने जिला प्रशासन से निर्माण सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने तथा अनियमितता मिलने पर संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह उपस्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के हजारों लोगों के इलाज का प्रमुख केंद्र बनेगा, इसलिए निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मामले की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्माण कार्य और उपयोग की जा रही सामग्रियों की जांच की तथा ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी और जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच पूरी किए बिना निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया तो वे जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक शिकायत करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलन भी करेंगे। साथ ही उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच, दोषियों पर कार्रवाई, जांच पूरी होने तक निर्माण पर रोक और मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।




