उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की धामी सरकार द्वारा कुछ स्थानों के नाम बदलने के फैसले से राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की है, जिनमें से अधिकांश नाम मुस्लिम शब्दावली से जुड़े थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:
कांग्रेस:
- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नाम बदलने के इस कदम को “जनता का ध्यान भटकाने का ढोंग” बताया।
- प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इसे “सिर्फ ध्रुवीकरण की राजनीति” करार दिया और सवाल उठाया कि क्या नाम बदलने से राज्य में बेरोजगारी दूर हो जाएगी।
समाजवादी पार्टी:
- उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा, “उत्तराखंड का नाम उत्तर प्रदेश-2 कर दीजिए।”
सरकार का पक्ष:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह फैसला “लोगों की जन भावनाओं के अनुरूप” है और “वहां की संस्कृति के अनुरूप” है। उन्होंने कहा कि नामों को “हमारे राज्य का स्वरूप देवभूमि, उसके अनुरूप होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह निर्णय जन भावनाओं के अनुरूप लिया गया है।
नाम परिवर्तन:
31 मार्च को घोषित नाम परिवर्तनों के अनुसार:
हरिद्वार:
- औरंगज़ेबपुर से शिवाजी नगर
- गाज़ीवाली से आर्य नगर
- चांदपुर से ज्योतिबा फुले नगर
- मोहम्मदपुर जट से मोहनपुर जट
- खानपुर कुर्सली से अंबेडकर नगर
- इंद्रीशपुर से नंदपुर
- खानपुर से श्री कृष्णपुर
- अकबरपुर फाजलपुर से विजयनगर
देहरादून:
- मियांवाला से रामजीवाला
- पीरवाला से केसरी नगर
- चांदपुर खुर्द से पृथ्वीराज नगर
- अब्दुल्लापुर से दक्ष नगर
नैनीताल:
- नवाबी रोड से अटल मार्ग
- पनचक्की – आईटीआई मार्ग से गुरु गोवलकर मार्ग
उधम सिंह नगर:
- नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी से कौशल्या पुरी





