कटिहार :जिले के आजमनगर प्रखंड स्थित गोरखनाथ धाम मंदिर सीमांचल क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर “मिनी बाबाधाम” के नाम से प्रसिद्ध है। सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु मनिहारी गंगा घाट से कांवड़ में जल लाकर बाबा गोरखनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसका संबंध नाथ संप्रदाय के महान योगी गुरु गोरखनाथ से माना जाता है। यह भी मान्यता है कि बौद्ध धर्म के प्रसार के बाद शिव उपासना को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आदि गुरु शंकराचार्य ने इस क्षेत्र में शिव आश्रम की स्थापना की थी। यही कारण है कि यह धाम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
गोरखनाथ धाम केवल कटिहार ही नहीं, बल्कि बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं की भी आस्था का केंद्र है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जहां हजारों कांवड़िए मनिहारी गंगा से पवित्र जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड में सालमारी-बारसोई मुख्य मार्ग पर स्थित इस मंदिर परिसर में सुंदर तालाब और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्थानीय समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। शांत वातावरण, धार्मिक पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व के कारण गोरखनाथ धाम को कटिहार का “देवघर” या “मिनी बाबाधाम” भी कहा जाता है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।




