कटिहार रेल एसपी हरि शंकर कुमार के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने MVI अस्मिता कुमारी, उसके कथित प्रेमी अजीत कुमार तथा सुपारी किलर राजू कुमार उर्फ धीरज को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में तीनों ने हत्या की साजिश और उसके क्रियान्वयन से जुड़े कई अहम तथ्यों को स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश कितने समय पहले रची गई थी और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही।
यह सनसनीखेज हत्याकांड पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। 34 दिनों तक उलझी रही यह मर्डर मिस्ट्री पुलिस की तकनीकी जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुलझाई गई। फिलहाल तीनों मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जबकि अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।
मिली जानकारी के अनुसार, जमुई में कार्यरत विद्युतकर्मी देवकुमार गुंजन 11 जून को जनसाधारण एक्सप्रेस से अपनी पत्नी से मिलने घर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान मानसी रेल थाना क्षेत्र के बदलाघाट के समीप चलती ट्रेन में उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल देवकुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद रेल पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। शुरुआत में यह मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर था। इसके बाद रेल एसपी के नेतृत्व में विशेष जांच दल और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त टीम गठित की गई।
टीम ने मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से जांच को आगे बढ़ाया। 34 दिनों की लगातार जांच के बाद पुलिस की जांच की दिशा मृतक की पत्नी अस्मिता कुमारी तक पहुंची।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सुपौल में तैनात MVI अस्मिता कुमारी का जहानाबाद निवासी अजीत कुमार के साथ प्रेम संबंध था। पुलिस के अनुसार, दोनों अपने रिश्ते में देवकुमार गुंजन को बाधा मानते थे। इसी कारण दोनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अस्मिता कुमारी और अजीत कुमार ने राजू कुमार उर्फ धीरज को सुपारी देकर हत्या की जिम्मेदारी सौंपी। 11 जून को चलती ट्रेन में देवकुमार को बेहद करीब से गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि पूरी वारदात को सामान्य अपराध या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन तकनीकी जांच के आधार पर पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया गया।




