कटिहार दूरदर्शन टावर का इतिहास | कभी मनोरंजन का केंद्र, आज लैंडमार्क

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कटिहार। कभी दूरदर्शन के कार्यक्रमों की पहली पसंद रहा कटिहार का टेलीविजन टावर आज भी शहर की पहचान के रूप में खड़ा है। वर्ष 1980 के दशक के अंतिम वर्षों या 1990 के दशक की शुरुआत में स्थापित इस टावर का उद्देश्य कटिहार शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक दूरदर्शन के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यक्रमों का प्रसारण पहुंचाना था। उस दौर में यह लोगों के लिए मनोरंजन, समाचार और शिक्षा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता था।

एनालॉग तकनीक के समय इस टावर से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों ने लाखों लोगों को दूरदर्शन से जोड़ा। ब्लैक एंड व्हाइट टीवी से रंगीन टीवी की ओर बढ़ते दौर में यह टावर लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया था। समय के साथ प्रसारण व्यवस्था को डिजिटल तकनीक के अनुरूप भी उन्नत किया गया, जिससे बेहतर गुणवत्ता में कार्यक्रमों का प्रसारण संभव हो सका।

हालांकि, इंटरनेट, डीटीएच और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बाद इस टावर की उपयोगिता पहले जैसी नहीं रही। आज अधिकांश लोग डिजिटल माध्यमों से मनोरंजन और समाचार देख रहे हैं, जिसके कारण दूरदर्शन टावर का सीधा प्रसारण सीमित हो गया है। बावजूद इसके, यह टावर आज भी कटिहार की ऐतिहासिक विरासत और संचार क्रांति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस स्थान पर कभी यह टावर बनाया गया था, उस समय वहां आबादी बहुत कम थी। लेकिन आज वही इलाका घनी आबादी वाले क्षेत्र में बदल चुका है। शहर आने वाले कई लोग आज भी इस टेलीविजन टावर को देखने पहुंचते हैं। भले ही समय के साथ इसकी भूमिका बदल गई हो, लेकिन कटिहार का दूरदर्शन टावर आज भी शहर के गौरव और इतिहास की एक खास पहचान बना हुआ है।

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Author: kelanchaltimes

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