गोड्डा: बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी, शुरू हुआ अभियान

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गोड्डा जिला प्रशासन ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। समाहरणालय परिसर से उपायुक्त लोकेश मिश्रा ने बाल विवाह रोकथाम जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और बालिका शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करेगा ताकि बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।

गोड्डा: बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख, जागरूकता रथ के माध्यम से समाज में आएगी नई क्रांति

गोड्डा : झारखंड का गोड्डा जिला बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। शुक्रवार को समाहरणालय परिसर में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में उपायुक्त लोकेश मिश्रा ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बाल विवाह रोकथाम जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान जिला स्तरीय वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समाज को इस सामाजिक कलंक से मुक्त कराना है।

उपायुक्त की दो टूक: बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त लोकेश मिश्रा ने बाल विवाह को समाज के लिए एक अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह न केवल बालिका के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह उसके शिक्षा और भविष्य के अवसरों को भी छीन लेता है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जागरूकता ही इस कुप्रथा को समाप्त करने का एकमात्र प्रभावी अस्त्र है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और बाल विवाह जैसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन का सहयोग करें।

जिले के हर कोने तक पहुँचेगा जागरूकता का संदेश

यह जागरूकता रथ गोड्डा जिले के सुदूरवर्ती प्रखंडों और पंचायतों में भ्रमण करेगा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम’ की बारीकियों से अवगत कराना है। इसके साथ ही, रथ के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। अभियान के तहत ग्रामीणों को यह समझाया जाएगा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह उनके परिवार और बच्चों के विकास में भी सबसे बड़ी बाधा है।

सामुदायिक सहभागिता पर जोर

उपायुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जागरूकता कार्यक्रमों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर निरंतर जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता के बिना किसी भी सरकारी अभियान को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती। इस दौरान जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिकाएं और आंगनबाड़ी सेविकाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की सोच में बदलाव लाएं।

भविष्य की ओर एक कदम

इस अभियान का लक्ष्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज के भीतर से बाल विवाह के प्रति व्याप्त मान्यताओं को बदलना है। जब एक जागरूक समाज बनता है, तो स्वतः ही कुरीतियां दम तोड़ने लगती हैं। गोड्डा प्रशासन का यह कदम उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनका भविष्य बाल विवाह की भेंट चढ़ जाता।

यह अभियान न केवल प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि गोड्डा जिला अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले दिनों में यह जागरूकता रथ जिले की फिजा में बदलाव लाएगा और उम्मीद है कि गोड्डा जल्द ही बाल विवाह मुक्त जिला बनने की ओर अग्रसर होगा।

rohini shree
Author: rohini shree

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