जमीन सौदे के चेक बाउंस मामले में फरार दोषी संजय रक्षित गिरफ्तार, छह माह की सजा के बाद भेजा गया जेल

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पाकुड़ : जमीन के असफल सौदे से जुड़े चेक बाउंस मामले में न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से फरार चल रहे संजय रक्षित को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। नगर थाना क्षेत्र के महुआडांगा निवासी बंकिम रक्षित के पुत्र संजय रक्षित को अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी (एसडीजेएम) सादिश उज्वल बेक की अदालत ने पूर्व में दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास और 2.50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के बाद से वह फरार था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

यह मामला जमीन के एक असफल सौदे से उत्पन्न वित्तीय देनदारी से जुड़ा है। राजापाड़ा निवासी हरेराम भास्कर ने अपने अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर किया था। शिकायत के अनुसार, जमीन के सौदे के विफल होने के बाद संजय रक्षित पर 1.40 लाख रुपये की देनदारी थी। इस राशि के भुगतान के लिए उसने झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक के 70-70 हजार रुपये के दो चेक जारी किए थे।

जब शिकायतकर्ता ने दोनों चेक भारतीय स्टेट बैंक की पाकुड़ शाखा में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए, तो 13 सितंबर 2023 को खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण दोनों चेक अनादरित (बाउंस) हो गए। इसके बाद 26 सितंबर 2023 को विधिक नोटिस भेजा गया, जो 6 अक्टूबर 2023 को आरोपी को प्राप्त हुआ। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 1 नवंबर 2023 को न्यायालय में परिवाद दायर किया गया।

सुनवाई के दौरान संजय रक्षित ने अपने अधिवक्ता सालेहा नाज के माध्यम से दावा किया कि अधिकांश राशि लौटा दी गई है और केवल 20 हजार रुपये शेष हैं। हालांकि, वह अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी या मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने माना कि आरोपी अपने बचाव में कोई विश्वसनीय प्रमाण पेश नहीं कर पाया।

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद एसडीजेएम सादिश उज्वल बेक की अदालत ने 31 अक्टूबर 2025 को संजय रक्षित को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देने से इनकार करते हुए कहा कि चेक अनादरण के मामलों में अनावश्यक नरमी शिकायतकर्ता के साथ न्याय नहीं होगी।

न्यायालय ने संजय रक्षित को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाते हुए 2.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया। आदेश में कहा गया कि जुर्माने की पूरी राशि शिकायतकर्ता हरेराम भास्कर को प्रतिकर (Compensation) के रूप में दी जाएगी।

सजा सुनाए जाने के बाद से संजय रक्षित लगातार फरार चल रहा था। उसके विरुद्ध अन्य मामलों में भी न्यायालय से वारंट जारी थे। पुलिस ने लगातार तलाश के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से अग्रेतर न्यायिक कार्रवाई के तहत उसे जेल भेज दिया गया।

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Author: kelanchaltimes

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