पाकुड़िया में हाई रिस्क प्रेगनेंसी प्रबंधन प्रशिक्षण शुरू, मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर

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पाकुड़िया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पाकुड़िया में मंगलवार से हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) प्रबंधन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण का उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारत भूषण भगत ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में जोखिम की समय पर पहचान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।

पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में एएनएम, सहिया और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान, नियमित निगरानी, समय पर उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अत्यधिक एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व में हुए जटिल प्रसव और अन्य जोखिम कारकों की शुरुआती पहचान पर विशेष जोर दिया गया।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारत भूषण भगत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जोखिम की पहचान नहीं होने से कई बार गर्भवती महिलाओं की स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, नियमित प्रसव पूर्व जांच, संतुलित पोषण तथा फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियों के सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. मंजर आलम, डॉ. वसीम राजा, डॉ. अभय सराफ, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर मृत्युंजय कुमार, पीरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीडर दुर्गेश दुबे और सीनियर प्रोग्राम लीडर अम्लान त्रिवेदी सहित कई स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से पाकुड़िया प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।

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Author: kelanchaltimes

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